*शहर के दो नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होंगे उच्चीकृत, बनेंगे पॉली क्लिनिक*
प्रत्येक केन्द्र पर प्रतिदिन मिलेंगी दो विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं
पॉली क्लिनिक के लिए नगरीय अस्पतालों का चिन्हिकरण कर रहा है स्वास्थ्य विभाग
*गोरखपुर।* जिले के दो नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उच्चीकृत किए जाएंगे। इन अस्पतालों में पॉली क्लिनिक बनाया जाएगा, जहां पर प्रतिदिन दो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे। साथ में फिजियोथेरेपी और नेत्र जांच की सुविधा भी मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग इन अस्पतालों के लिए नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केई के चिन्हिकरण में जुट गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने बताया कि गोरखपुर शहर के ऐसे नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का उच्चीकरण कर पॉली क्लिनिक बनाए जाने पर जोर होगा, जहां अधिकाधिक मरीजों को सेवाएं दी जा सकें। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक से प्राप्त पत्र में मिले दिशा-निर्देशों के अनुसार इन केंद्रों का विकास होगा।
सीएमओ ने बताया कि मिशन निदेशक के पत्र के अनुसार पॉली क्लिनिक पर विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं निजी क्षेत्र से नियमानुसार मानदेय का भुगतान कर ली जाएंगी। प्रत्येक केन्द्र पर अलग-अलग कार्यदिवसों में अलग-अलग विधाओं जैसे मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, ईएनटी, आर्थो सर्जन, आई सर्जन और स्किन आदि के विशेषज्ञ चिकित्सक बैठाए जाएंगे। साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट और आप्टोमैट्रिस्ट भी इन क्लिनिक पर तैनात होंगे। इन क्लिनिक के विकास के लिए उपयुक्त नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का चयन कर इसी सप्ताह शासन को भेज दिया जाएगा। स्वीकृति मिलने के पश्चात काम तेज कर दिया जाएगा।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि नगरीय स्वास्थ्य केन्द्रों के विकास से मरीजों को जिला स्तरीय अस्पतालों और मेडिकल कॉलेज की भीड़ से बचाया जा सकता है। साथ ही इन उच्च चिकित्सा केन्द्रों पर अनावश्यक के लोड को भी कम किया जा सकेगा। शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों के चतुर्दिक विकास के लिए स्वास्थ्य विभाग तत्पर है। इसी कड़ी में सबसे पहले इन केन्द्रों का प्रचार प्रसार कराया गया, जिसकी वजह से इन केन्द्रों पर मरीजों की संख्या बढ़ी है।
सीएमओ ने कहा कि नगरीय अस्पताल में बढ़े हुए मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सेवाएं देने के लिए सभी शहरी स्वास्थ्य केन्द्रों को डिजिटल कर दिया गया है। वहां सभी पर्चे ऑनलाइन बनाए जा रहे हैं। साथ ही जो मरीज जिला अस्पताल के लिए रेफर किए जाते हैं उन्हें पर्चे बना कर दिये जाते हैं ताकि मरीजों को दोबारा जिला अस्पताल की लाइन में न लगनी पड़ी और उन्हें समय से सेवाएं मिल सकें।
