श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन का कारुणिक प्रसंग सुनाते हुए श्वेतिमा माधव प्रिया की वाणी से छलक उठी भक्ति और भावनाएँ
सप्तम दिवस की कथा विश्राम पर श्रद्धालु हुए भाव-विह्वल
पूर्णाहुति के हवन से गुंज उठा रामा बाबा धाम, बहने लगे प्रेमाश्रु
बांसगांव (गोरखपुर)।
रामा बाबा ब्रह्मस्थान की पावन भूमि रविवार को ऐसी अध्यात्मिक विभा में नहाई कि हर हृदय भक्ति के सागर में डूब गया। सप्ताहव्यापी संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा महापुराण के सप्तम दिवस एवं कथा विश्राम पर, विश्व की सबसे कम आयु की अंतरराष्ट्रीय बाल व्यास कुमारी श्वेतिमा माधव प्रिया ने श्रीकृष्ण-सुदामा मिलन और भगवान श्रीकृष्ण के निजलोक गमन का इतना कारुणिक और आत्मस्पर्शी वर्णन किया कि उपस्थित जनसमूह की आंखें अश्रु-सिंचित हो उठीं।
जब श्वेतिमा के कोमल कंठ से सुदामा की निर्धनता, भूख और नंगे पांवों में कांटे चुभते हुए द्वारका तक की यात्रा का वर्णन हुआ — तो वातावरण मौन हो गया। और जब बाल व्यास ने सुदामा के स्वागत में श्रीकृष्ण के चरणों में झुकने का भाव भरा प्रसंग सुनाया, तब हर श्रोता का हृदय प्रेम और विनम्रता से भर उठा।
उनकी मधुर वाणी से निकले शब्द जैसे सीधे आत्मा को स्पर्श कर रहे हों —
सच्चा प्रेम न रूप देखता है, न वैभव।
सच्चा प्रेम तो केवल हृदय की सरलता और समर्पण से उपजता है।”
जैसे-जैसे कथा अपने निजलोक गमन के प्रसंग की ओर बढ़ी, श्वेतिमा की आँखों की नमी ने भी मानो संपूर्ण वातावरण को भिगो दिया। भक्तों की रुलाई और मंत्रों की गूंज एक साथ उठी — भक्ति और विरह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कथा विश्राम के उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूर्णाहुति का हवन संपन्न हुआ। श्रद्धालुओं ने हृदय में श्रीकृष्ण के प्रति प्रेमाश्रु समेटे, अग्नि में आहुति अर्पित की। पूरा परिसर देवत्व की आभा से आलोकित हो उठा।
इस अवसर पर संत डॉ. सौरभ पांडेय, डॉ. रागिनी पांडेय, मुख्य यजमान श्री दरोगा सिंह व श्रीमती ऊषा सिंह, नायब तहसीलदार जीवेंद्र त्रिपाठी, आचार्य गौरव पांडेय, डॉ. विनय श्रीवास्तव, पुजारी विकास मिश्रा (सर्वकार), विनोद सिंह, बाल भक्त सौराष्ट्र, बंटी चंद, वीर बहादुर सिंह, राम मिलन सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
