
एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स (APCR) द्वारा जेल में संविधान दिवस पर विशेष कार्यक्रम
’संविधान सिर्फ़ क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि नैतिक मार्गदर्शक भी है’ – एडवोकेट मोहम्मद राफे
गोरखपुर – संविधान दिवस के अवसर पर एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स (APCR) की ओर से गोरखपुर के बिछिया जेल में एक विशेष और सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कैदियों में भारतीय संविधान की महत्ता, नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस मौके पर APCR के प्रतिनिधि एडवोकेट मोहम्मद राफे़ और एडवोकेट मोहम्मद आसिम ने भारतीय संविधान के इतिहास, उसके मूल सिद्धांतों तथा सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के संदेश पर विस्तृत चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि संविधान केवल एक क़ानूनी दस्तावेज़ नहीं, बल्कि एक नैतिक मार्गदर्शक भी है, जो हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने कैदियों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। संवैधानिक जिम्मेदारियों को समझें और रिहाई के बाद समाज में सकारात्मक भूमिका निभाएँ।
एडवोकेट मोहम्मद फ़हद ख़ान ने संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों और मौलिक कर्तव्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक डी. के. पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को सामूहिक रूप से पढ़कर सभी को संकल्प दिलाया गया, जिससे वातावरण में देशभक्ति और संवैधानिक चेतना का भाव और अधिक मजबूत हुआ। जेल अधीक्षक ने APCR के इस उद्देश्यपूर्ण प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण और जानकारीपूर्ण कार्यक्रम कैदियों के मानसिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
APCR की टीम ने जेल प्रशासन का विशेष धन्यवाद प्रकट किया और आगे भी इसी प्रकार के रचनात्मक और कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित करने के संकल्प का इज़हार किया।
