कुरआन पढ़ें,‌ सीखें, समझें, सिखाएं और उस पर अमल करें : मुफ़्ती खालिद अय्यूब

तुर्कमानपुर में इस्लामी बहनों के लिए दर्स-ए-कुरआन का शुभारंभ

गोरखपुर। रविवार को मकतब इस्लामियात तुर्कमानपुर में इस्लामी बहनों के लिए साप्ताहिक दर्स-ए-कुरआन (व्याख्यान) का शुभारंभ किया गया। कुरआन-ए-पाक का व्याख्यान प्रत्येक रविवार को सुबह साढ़े ग्यारह बजे से दिया जाएगा। दर्स के पहले दिन बड़ी संख्या में इस्लामी बहनों ने हिस्सा लेकर अपने दीनी जज्बे का इजहार किया।

दर्स-ए-कुरआन का शुभारंभ करते हुए तहरीक उलमा-ए-हिंद राजस्थान के चेयरमैन मुफ्ती खालिद अय्यूब मिस्बाही नक्शबंदी ने कहा कि कुरआन को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना ही इसके अवतरण (नाजिल होने) का मुख्य उद्देश्य है। यह पवित्र ग्रंथ न केवल इबादत के लिए है, बल्कि पूरी मानवता के लिए जीवन जीने का एक मार्गदर्शक है। कुरआन-ए-पाक को रोजाना पढ़ने की आदत डालें। कुरआन को सही उच्चारण और नियमों के साथ पढ़ना जरूरी है। यदि आप अरबी नहीं जानते, तो हिंदी या उर्दू में अनुवाद और व्याख्या पढ़ें। बिना समझे पढ़ना केवल शब्दों को दोहराना है, जबकि इसका असली सार समझने में है। आयतों के अर्थ पर विचार करें कि अल्लाह आपसे क्या कह रहा है। कुरआन को केवल ज्ञान के लिए नहीं, बल्कि खुद को बदलने के लिए पढ़ें। इसमें दिए गए आदेशों (जैसे सच बोलना, दान देना, न्याय करना) का पालन करें। कुरआन की शिक्षाओं को अपनी अमली (व्यावहारिक) जिन्दगी में लागू करना ही सफलता का आधार है। यह हर मुसलमान का फर्ज है कि वह जो सीखे, उस पर अमल करे। कुरआन पढ़ना, समझना, सीखना, सिखाना, और उस पर अमल करना हर मुसलमान अहम कर्तव्य है।

दर्स संयोजक हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि कुरआन को सिर्फ पढ़ना ही नहीं, बल्कि समझकर और गौर-ओ-फिक्र के साथ पढ़ना चाहिए ताकि उसकी शिक्षाओं को दैनिक जीवन में अमल (लागू) किया जा सके। यह केवल सवाब के लिए नहीं, बल्कि हिदायत का जरिया है, जो आत्मा की शुद्धि, मानसिक शांति, और अल्लाह के साथ गहरा संबंध बनाने में मदद करता है। कुरआन को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि रुक-रुक कर और समझकर पढ़ना चाहिए। आयतों पर सोचें कि वे आपके जीवन में कैसे लागू होती हैं। जो पढ़ें, उसे अपने चरित्र, व्यवहार और फैसलों में उतारें। कुरआन-ए-पाक को समझना हर मुसलमान के लिए महत्वपूर्ण है।

आखिर में दुरूद ओ सलाम पढ़कर अमन ओ अमान की दुआ मांगी गई। कार्यक्रम में ज्या वारसी, शिफा खातून, सना फातिमा, फिजा खातून, शालिबा, मुबस्सिरा, आस्मा खातून, नूरजहां, खुशी, फिजा खातून, सानिया, अदीबा, गुलफिशा सहित तमाम इस्लामी बहनों ने हिस्सा लिया।

By Minhajalisiddiquiali

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