गोरखपुर । रंगमण्डल, गोरखपुर द्वारा प्रसिद्ध व्यंग्य एवं हास्य नाटक ‘गदहे की बारात’ का मंचन 30 अगस्त 2026, रविवार को सायं 6:30 बजे राजकीय बौद्ध संग्रहालय, तारामंडल, गोरखपुर में किया । नाटक के लेखक हरिभाऊ बाडगांवकर हैं, जबकि इसकी परिकल्पना एवं निर्देशन अजीत प्रताप सिंह ने किया है।
‘गदहे की बारात’ एक ऐसा व्यंग्यात्मक नाटक है, जिसमें हास्य और मनोरंजन के माध्यम से सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था पर करारा प्रहार किया गया है। नाटक की कथा दर्शकों को गुदगुदाने के साथ-साथ उन्हें व्यवस्था, सत्ता और समाज की विसंगतियों पर सोचने के लिए भी विवश करती है। नाटक का शीर्षक भले ही हास्य पैदा करता हो, लेकिन इसके भीतर छिपा व्यंग्य गंभीर सामाजिक प्रश्नों को सामने लाता है।
पात्र एवं कलाकार
कल्लू — रितेश चौहान,गंगी — पूर्णिमा आनंद,बृहस्पति — अजय यादव,इन्द्र — हरीश हंस
द्वारपाल — सुनील राजा,चित्रसेन / गदहा — ऋषभ गौड़,राजा — विनोद चन्द्रेश,दीवान — नागेन्द्र कुमार,राजकुमार — डिंपल श्रीवास्तव,बुआ — बबिता हंसनी,रंभा — सोनाक्षी
देवता — प्रियांशु,मंच के पीछे,रूप-सज्जा — राजेश्याम,संगीत संयोजन —,विवेक श्रीवास्तव,संगीत,नियंत्रण —,हरीशुल हक,प्रकाश —,अजीत प्रताप सिंह,प्रस्तुति नियंत्रण — नागेन्द्र कुमार,सहयोग — जान्हवी चौहान,नाटक के निर्देशक अजीत प्रताप सिंह ने बताया कि रंगमंच केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का भी सशक्त माध्यम है। ‘गदहे की बारात’ के माध्यम से दर्शकों को हास्य और व्यंग्य के साथ एक सार्थक रंगमंचीय अनुभव देने का प्रयास किया गया है।
इस प्रस्तुति में राजकीय बौद्ध संग्रहालय, तारामंडल, गोरखपुर का विशेष सहयोग प्राप्त है। रंगमण्डल, गोरखपुर ने शहर के रंगप्रेमियों, साहित्यप्रेमियों एवं आम दर्शकों ने अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित हुए ।


