*शीश महल दरगाह से मिलता है एकता, मुहब्बत और भाईचारे का पैगाम*

*दशहरे पर जियारत की खास अहमियत, सभी धर्मों के लोग मांगते हैं मनोकामनाओं की मुराद*

*जाफरा बाजार स्थित हजरत सैयद गाजी मोमिन शीश अली शाह की दरगाह आस्था और सांप्रदायिक सद्भाव का अनूठा केंद्र*

*दशहरा और दीपावली पर दीप जलाने की पुरानी परंपरा, सभी धर्मों के लोग चादर चढ़ाकर करते हैं जियारत*

*“नफरत की दीवार बहुत बड़ी नहीं होती, मुहब्बत और भाईचारे से चंद लम्हों में ढह सकती है” : सज्जाद अली रहमानी*

गोरखपुर। दशहरा केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का पर्व नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे की भावना को मजबूत करने का भी अवसर है। गोरखपुर के जाफरा बाजार स्थित हजरत सैयद गाजी मोमिन शीश अली शाह रहमतुल्लाह अलैह की शीश महल दरगाह इस साझा संस्कृति और धार्मिक एकता की अनूठी मिसाल है। यहां दशहरे के अवसर पर जियारत की खास अहमियत है। दरगाह पर सभी धर्मों और समुदायों के लोग चादर चढ़ाने, मन्नतें मांगने और अकीदत के साथ हाजिरी देने पहुंचते हैं।
शीश महल दरगाह के इंतजामकार एवं गद्दीनशीन सज्जाद अली रहमानी ने बताया कि इस दरगाह से लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है। हिंदू धर्म के अनेक मानने वाले भी सपरिवार यहां पहुंचकर अपने कुलगुरु के रूप में हाजिरी देते हैं और श्रद्धापूर्वक जियारत करते हैं। दशहरा और दीपावली के अवसर पर दरगाह से जुड़ी आस्था और परंपराएं गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर पेश करती हैं।
उन्होंने बताया कि जब शीश महल का इलाका घने जंगल के रूप में था, तब यहां के बाशिंदे अपनी रक्षा, सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना के लिए दशहरा और दीपावली पर दीप जलाते थे। यह परंपरा समय के साथ आस्था और विश्वास का हिस्सा बन गई। लोगों का मानना है कि सच्चे दिल से मांगी गई दुआ और मनोकामना उन्हें सुकून तथा उम्मीद देती है। यही वजह है कि दरगाह पर आज भी विभिन्न धर्मों के लोग अपनी मुरादें लेकर पहुंचते हैं।
सज्जाद अली रहमानी ने कहा कि खानकाहों और दरगाहों ने हमेशा इंसानियत, मुहब्बत, एकता और भाईचारे का संदेश दिया है। शीश महल दरगाह किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सभी धर्मों, पंथों और मजहबों के लोगों की आस्था का साझा केंद्र है। यहां आने वाले लोगों के बीच आपसी सम्मान और सद्भाव की भावना इस बात का प्रमाण है कि इंसानियत का रिश्ता हर धार्मिक और सामाजिक सीमा से ऊपर है।
वर्तमान समय में समाज के भीतर नफरत और वैमनस्य की बढ़ती प्रवृत्तियों पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि नफरत की दीवार को गिराने के लिए प्रेम और भाईचारे के साथ खड़ा होना जरूरी है। हमारे हिंदू भाई हमेशा एक-दूसरे के साथ खड़े होकर इस नफरती दीवार को ढहाने के लिए तैयार रहते हैं। उन्होंने कहा कि नफरत की दीवार उतनी बड़ी नहीं होती, जितनी बड़ी उसे समझ लिया जाता है। आपसी विश्वास, सद्भाव और मुहब्बत से यह दीवार चंद लम्हों में ढह सकती है।
उन्होंने कहा कि दुनिया भर की दरगाहों ने सदियों से मानवता और प्रेम का पैगाम दिया है। शीश महल दरगाह की विशेषता भी यही है कि यहां आस्था के साथ इंसानियत का सम्मान होता है। दशहरे जैसे पर्व पर इस दरगाह की परंपरा समाज को यह संदेश देती है कि धर्म और पूजा-पद्धतियां भले अलग हों, लेकिन प्रेम, शांति, एकता और भाईचारे की भावना सभी को एक सूत्र में बांधती है।

By Minhajalisiddiquiali

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