*’शतावरी की उन्नत खेती’ अभियान: स्वास्थ्य और समृद्धि का नया मार्ग*
गोरखपुर,महिला एवं बाल विकास संस्थान, गोरखपुर द्वारा ‘प्रजापति वशिष्ठ अभियान’ के अंतर्गत शतावरी की उन्नत खेती को लेकर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय और राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड के सहयोग से आयोजित इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों और आम नागरिकों को शतावरी के स्वास्थ्य लाभों और इसकी खेती से होने वाले आर्थिक फायदों के प्रति जागरूक करना है।संस्थान द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, शतावरी (अस्पर्शगस रेसमोसूस ) एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है। यह न केवल शरीर को आंतरिक रूप से मजबूत बनाती है, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। यह हार्मोन संतुलन, पाचन तंत्र में सुधार, रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने और तनाव कम करने में सहायक है। इसके अलावा, यह हड्डियों और मांसपेशियों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।संस्थान ने बताया कि शतावरी की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली है। इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है जिसका पीएच मान 6.5 से 8.0 के बीच हो। बुवाई का सबसे अच्छा समय फरवरी से अप्रैल तक का होता है। 8 से 10 महीने की फसल अवधि के बाद, प्रति एकड़ लगभग 8-12 क्विंटल की उपज प्राप्त की जा सकती है। इसे घर की छतों, बालकनी या छोटे बगीचों में गमलों में भी आसानी से उगाया जा सकता है।महिला एवं बाल विकास संस्थान के इस अभियान के माध्यम से किसान उत्पादक संगठन (एफ.पी.ओ. ) और स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा जा रहा है, ताकि किसानों को सरकारी योजनाओं और प्रशिक्षण का सीधा लाभ मिल सके। संस्थान ने अपील की है कि बेहतर स्वास्थ्य और आर्थिक मजबूती के लिए लोग शतावरी की खेती को अपनाएं.
