रोजेदारों ने अल्लाह की इबादत कर मांगी दुआ

गोरखपुर। सोमवार को 21वां रोज़ा मुकम्मल हो गया। अब रोज़ा थोड़ा लंबा होता जा रहा है। माह-ए-रमज़ान का तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का चल रहा है। हर तरफ नूरानी समा है। मस्जिदों व घरों में इबादत जारी है। रोजेदारों की इबादतों में कोई कमी नहीं है। एतिकाफ करने वाले इबादत में मश्गूल हैं। रोजेदार इबादत कर पूरी दुनिया में अमनो शांति की दुआ मांग रहे हैं।

शिक्षक मोहम्मद आज़म कहते हैं कि सामान्यत: अन्य महीनों में और खास तौर पर रमज़ान माह में फ़क़ीर, ग़रीब, यतीम व अन्य मोहताज मांगने वालों को न झिड़कें। खास तौर से मदरसा के प्रतिनिधियों के साथ मेहरबानी और अच्छा सुलूक करें। उन हजरात का अहसान है कि रमज़ान में भूखे प्यासे रह कर मालदारों के माल की जकात लेकर माल पाक करने का रास्ता निकालते हैं। अगर मौका मिले तो उनको इफ्तार और खाने में शरीक करें और सवाब हासिल करें।

शिक्षक नवेद आलम ने बताया कि पाक कुरआन कहता है कि तुम वह बेहतरीन उम्मत हो, जिसे लोगों के लिए बनाया गया है। तुम्हारा काम है कि तुम लोगों को नेकी का हुक्म दो, बुराई से रोको, अल्लाह पर यकीन रखो। रोज़े में अल्लाह का खौफ, उसकी वफादारी, इताअत, मोहब्बत तथा सब्र का जज़्बा हमें इंसानियत और इंसानी दर्द को पहचानने की सीख देता है।

हज़रत अली को शिद्दत से किया याद

चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में 21 रमज़ान को अमीरुल मोमिनीन हज़रत सैयदना अली रदियल्लाहु अन्हु के शहादत दिवस पर सामूहिक रूप से कुरआन ख्वानी व दुआ ख्वानी कर अकीदत का नज़राना पेश किया गया। वहीं मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक व मदरसा रज़ा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में महफ़िल हुई।

मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी ने कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दामाद व मुसलमानों के चौथे ख़लीफा हज़रत अली की शहादत 21 रमज़ान को हुई। आप दामादे रसूल हैं। दो जन्नती जवानों के सरदार हज़रत इमाम हसन व हज़रत इमाम हुसैन के वालिद हैं। खातूने जन्नत हज़रत फातिमा ज़हरा के शौहर हैं। हज़रत अली का जिक्र करना भी इबादत में शुमार है।

मस्जिद के इमाम मौलाना महमूद रज़ा कादरी ने कहा कि पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान है कि जिसका मैं मौला, अली भी उसके मौला। जिसका मैं आका, अली भी उसके आका। जिसका मैं रहबर, अली भी उसके रहबर। जिसका मैं मददगार, अली भी उसके मददगार। हज़रत अली का बहुत बड़ा मर्तबा है। हमें भी हज़रत अली के नक्शे-कदम पर चलने की पूरी कोशिश करनी चाहिए तभी दुनिया व आख़िरत में फायदा होगा।

मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में मौलाना दानिश रज़ा अशरफी ने कहा कि हज़रत अली इल्म का समंदर हैं। बहादुरी में बेमिसाल हैं। आपकी इबादत, रियाजत, परहेजगारी और पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व सहाबा किराम से मोहब्बत की मिसाल पेश करना मुश्किल है।

मरकजी मदीना जामा मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी ने कहा कि हज़रत अली फरमाते हैं कि अल्लाह की कसम मैं कुरआन की आयतों के बारे में सबसे ज्यादा जानने वाला हूं। पैग़ंबरे इस्लाम ने फरमाया कि मैं इल्म का शहर हूं और अली उसके दरवाजा हैं। अब जो इल्म से फायदा उठाना चाहता है वह बाबे इल्म से दाखिल हो। अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो-अमान की दुआ मांगी गई। इस मौके पर नेहाल, मुन्ना, फैजान, हाफिज शारिक, हाफिज गुलाम गौस, असलम, आरिफ, तारिक, फुजैल, चांद आदि मौजूद रहे।

ईद के लिए बाज़ार गुलज़ार

सेवईयों की खरीदारी में तेजी है। बाजार में रौनक है। दिन रात बाज़ार गुलज़ार नज़र आ रहा है। ईद के लिए उर्दू बाज़ार, रेती, घंटाघर, शाह मारूफ, रेती, गोलघर, जाफरा बाज़ार आदि सज चुका है। खरीदारी जोरों पर है। लोग यहीं से ईद की खरीदारी करना पसंद कर रहे हैं। ज्वैलरी, कपड़ा, बैग, चूड़ियां, रेडीमेड गारमेंट्स, क्राकरी सहित जरूरत का हर सामान यहां मिल रहा है। बाजार में जूता, चप्पल, प्लास्टिक व अन्य धातुओं के बर्तन, शीशे का समान, टोपी, इत्र, आर्टीफिशियल ज्वैलरी उचित मूल्य पर मिल रही है। कुर्ता पायजामा, शर्ट-पैंट, सलवार सूट के कपड़ों की खूब बिक्री हो रही है। सुबह दुकान खुल रही है तो देर रात तक चल रही है। शाम होते ही बाज़ार बिजली की रोशनी में नहा जा रहा है।

रोज़े की हालत में नाक में स्प्रे या दवा डालने से रोज़ा टूट जाएगा : उलमा किराम

उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमज़ान हेल्पलाइन नंबरों पर सोमवार को सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने नमाज़, रोज़ा, जकात, फित्रा, एतिकाफ, शबे कद्र आदि के बारे में सवाल किए। उलमा किराम ने क़ुरआन ओ सुन्नत की रोशनी में जवाब दिया।

  1. सवाल : क्या मोअतकिफ (एतिकाफ करने वाला) खाने, पीने और सोने के लिए मस्जिद से बाहर जा सकता है? (हुसैन अहमद, सूर्यविहार कॉलोनी)

जवाब : नहीं। मोअतकिफ मस्जिद ही में खाए, पिए और सोए उसे इन कामों के लिए बाहर जाने की इजाज़त नहीं। हां, खाने, पीने और सोने में एहतियात लाज़िम है कि मस्जिद आलूदा (गंदी) न हो। (मुफ्ती मेराज)

  1. सवाल : घर में झाड़ू देते वक्त गर्द ओ गुबार हलक में चला जाता है क्या इससे रोज़ा टूट जाएगा? (अब्दुल, लालडिग्गी)
    जवाब : नहीं। झाड़ू लगाते वक्त गर्द ओ गुबार के हलक में चले जाने से रोज़ा नहीं टूटेगा। इसी तरह ख़ुशबू और धुआं या किसी बू वाली चीज़ बिला इरादा जाने से भी नहीं टूटेगा। अगरचे रोज़ेदार होना याद हो। (मुफ्ती अख़्तर)
  2. सवाल : रोज़े की हालत में नाक में स्प्रे या दवा डाल सकते है? (अब्दुल समद, तुर्कमानपुर)
    जवाब : नहीं। रोज़े की हालत में नाक में स्प्रे या दवा डालने से रोज़ा टूट जाएगा। (मौलाना मोहम्मद अहमद)

By Minhajalisiddiquiali

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