*संसद में जनताहित की समस्याओं को छोड़कर, समोसे के आकार पर बहस करना शर्मनाक: आफताब अहमद*
गोरखपुर। समाजवादी पार्टी के पूर्व महानगर सचिव आफताब अहमद ने संसद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस संसद पर प्रति सेकेंड लाखों रुपये खर्च होते हैं, वहां जनता की ज़रूरी समस्याएं बिजली कटौती, खराब सड़कें, जलभराव, भीषण जाम, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे जनहित के मुद्दों पर चर्चा की बजाय समोसे के आकार पर सवाल उठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और हास्यास्पद है।
गोरखपुर के सांसद रवि किशन द्वारा संसद में ‘रेलवे स्टेशन पर बिकने वाले समोसे छोटे क्यों होते हैं’ जैसे मुद्दे को उठाना संसद की गरिमा और जनता की अपेक्षाओं के साथ मज़ाक है। जब देश और विशेषकर पूर्वांचल भीषण समस्याओं से जूझ रहा हो, तब ऐसे ‘मनोरंजक मुद्दों’ को सदन में उठाना लोकतांत्रिक जिम्मेदारी से बचने का प्रयास है।
आफताब अहमद ने कहा कि सांसदों को चाहिए कि वे जनता के मुद्दों को सदन में पूरी गंभीरता से उठाएं। “अगर सांसद लोकसभा को भी एक रंगमंच समझने लगें तो जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा?” उन्होंने तीखे शब्दों में कहा।
उन्होंने आगे कहा कि गोरखपुर की आम जनता इन दिनों लगातार बिजली संकट का सामना कर रही है, जलभराव से गलियां डूबी हुई हैं, और ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में एक सांसद का ध्यान समोसे के आकार पर है, तो सवाल उठाना लाज़मी है कि आखिर जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता क्या है?
उन्होंने अंत में अपील की कि जनता ऐसे नेताओं को ज़रूर जवाब दे जो संसद में अपना कर्तव्य भूल कर व्यर्थ विषयों पर समय नष्ट करते हैं। “हमें ऐसे जनसेवकों की ज़रूरत है जो जमीन से जुड़े हों, न कि ऐसे कलाकार जो सदन को ही शो बना दें!
