*वरिष्ठ समाजसेवी ने गोलघर काली मंदिर, विष्णु मंदिर समेत तमाम स्थानों पर गरीबो की मदद*
*ईश्वर ने दौलत दी है तो दिल खोल कर करता हूं मदद -नवाब फारुख अशरफ*
गोरखपुर । समाज में बहुत से लोग हैं जिन्हें ईश्वर ने दौलत तो दी है मगर दिल नहीं दिया है।वह इंसान ही वह क्या है जो सिर्फ अपने लिए जिए जो दूसरे के लिए दिए उसे ही सही मायने में इंसान कहते हैं और इंसानियत का कोई धर्म मजहब नहीं होता है समाज के उन लोगों की मदद करके दिल को जो सुकून मिलता है इसका एहसास सिर्फ वही व्यक्ति कर सकता है जो सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता है और ऊपर बैठा ईश्वर भी देखा है कि जिस इंसान को उसने दौलत दी है उसके पास दिल भी है और वह दिलदार व्यक्ति दिल खोलकर लोगों की मदद करता है गोरखपुर का एक ऐसा युवा जिसके पूर्वज भी सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते हैं ऐसे ही वरिष्ठ समाजसेवी नवाब फारूख अशरफ है जिनके पिता पूर्व पार्षद अशरफ भी लोगों की दिल खोल कर मदद करते हैं।
रविवार को वरिष्ठ समाजसेवी नवाब फारूख अशरफ ने शहर विधानसभा क्षेत्र के गोलघर काली मंदिर, विष्णु मंदिर समेत तमाम स्थानों पर गरीब बेसहारा लोगों को ब्रेड, दूध ,दही का पैकेट वितरित किया तो उन उदास चेहरे पर खुशी दिखाई दी। सड़क से तो लाखों लोग रोज गुजरते होंगे। और सड़क पर पड़ने वाले मंदिर, मजार के पास गरीब बेसहारा लोग बड़ी हसरत भरी निगाह के देखे हैं कि कोई बंदा तो उनके भूखे पेट की आग को ठंडा कर दे मगर लोग देख कर गुजर जाते हैं मदद करना तो दूर अगर किसी ने हाथ फैला दिया तो इस कदर झल्ला कर फटकार लगाते हैं जैसे मानो उसने कोई बहुत बड़ी दौलत मांग ली। गरीब व्यक्ति कहता है कि साहब अगर कुछ दे नहीं सकते हो तो कम से कम प्यार के दो मीठे बोल ही बोल दो की ,बाबा माफ करें। हम कोई आपसे लड़ने तो नहीं जा रहे हैं। बस आपके सामने झोली फैला दी मर्जी आपकी है दें या ना दे।
गरीब बेसहारों के दर्द को समझने वाले नवाब फारूक अशरफ कहते हैं कि बरसों से हम यह कार्य कर रहे हैं समाज सेवा का एक ऐसा जुनून सिर पर सवार है कि बड़े बुजुर्ग ने सिखाया है कि तुम एक रोटी दोगे वह लाख रोटी देगा ऊपर वाले ने मुझे इस लायक बनाया है कि मैं दूसरों की मदद कर सकूं। आज हमने गरीब बेसहारा लोगों को ब्रेड दूध दही वितरित किया गया है मदद का यह सिलसिला हमारा लगातार चलता रहता है।
