गोरखपुर ।
अभियान थिएटर ग्रुप द्वारा भारतेंदु नाट्य अकादमी, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज और ड्रामा टाकीज के सौजन्य से आयोजित नेशनल थिएटर फेस्टिवल, गोरखपुर रंग महोत्सव 2023 में शुक्रवार को
रंग विमर्श कार्यक्रम में “बेहतर रंगमंच की रेसिपी” विषय पर वार्ताकार नीरज कुंदेर, वरिष्ठ रंगनिर्देशक, सीधी, मध्य प्रदेश ने सुप्रसिद्ध नाट्य कर्मी एवं फिल्म अभिनेता पीयूष मिश्रा से बात की ।
चर्चा के दौरान पीयूष मिश्रा ने कहा कि रंगमंच करने के लिए पहले भी परेशानियां थीं और आज भी उतनी ही परेशानी है । जो भी अभिनय की दुनिया में आना चाहता है उसे रंगमंच जरूर करना चाहिए। 4 साल 5 साल जमकर थिएटर करें तब जाकर कर वह सिनेमा ज्वॉइन करें । श्री मिश्र ने कहा कि रोटी की जरूरत सबको है । आगे उन्होंने कहा कि थिएटर में ऐसा माना जाता है कि जो लोग मादक द्रव्यों का सेवन करते हैं वह बेहतर थिएटर, बेहतर मंच या उनके अभिनय में निखार आता है लेकिन ऐसा कत्तई नहीं है । शराब पीकर आप कुछ नहीं कर सकते । पढ़ाई सबको करनी चाहिए । मेरा स्वयं का जो अनुभव है पढ़ाई से हम भाग रहे थे । मुझे खुद फिजिक्स मैथ से बहुत डर लगता था। एक्टर बनना है और फिजिक्स पढ़ना है यह बात कुछ हजम नहीं हो रही थी । आजकल के अभिभावकों को बच्चों से पूछना चाहिए कि क्या वह पढ़ना चाहता है । उन्होंने कहा कि मेकअप, लाइट, कोरियोग्राफर जैसी विधा में फिजिक्स मैथ की पढ़ाई की क्या आवश्यकता ? एक्टिंग से आसान पैसा कमाना दुनिया में कहीं नहीं है । बच्चों को 5 से 15 साल तक पढ़ाइए सिखाए । 15 साल के बाद उनके ऊपर छोड़ दीजिए वह क्या बनना चाहते हैं और वह क्या करना चाहते हैं । उन्होंने कहा कि आप इंडस्ट्री में सफल लोगों को देखते हैं और सोचते हैं हम क्यों नहीं बन पाए हैं । भाग्य लेकर कोई लाइफ में नहीं बड़ा बन पाया है । सभी लोगों ने स्ट्रगल किया है। श्री मिश्र ने बताया कि उन्होंने 1989 में भारत एक खोज सीरियल के दो-तीन एपिसोड में काम किया। उस समय आधा अधूरा इंसान थे । अनुराग कश्यप का जिक्र करते हुए श्री मिश्र ने कहा कि वह मेरे बहुत अज़ीज़ हैं, प्यारे दोस्त हैं। दर्शकों की मांग पर अपने लिखे हुए गीत “आरंभ है प्रचंड बोल—–” को सुनाया जिसे दर्शकों ने खूब तालियां बजाई । दर्शकों से एक सवाल आया कि आध्यात्मिक होने के लिए क्या लेफ्ट होना जरूरी है तो इस पर उन्होंने कहा लेफ्ट में खूब काम किया, उत्तेजना था और जब अच्छी बात नहीं लिखाती थी तो रात में बेचैन रहता था । एक अन्य रंगकर्मी के सवाल पर कि थिएटर करने में बहुत परेशानी आती है तो उन्होंने कहा थिएटर ऐसे ही होता है । और अंत में अपनी लिखी हुई नावेल “तुम्हारी औकात क्या है” के बारे में उन्होंने ने चर्चा की। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर प्रोफेसर पूनम टंडन ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। आयोजन के अध्यक्ष डॉक्टर हर्षवर्धन राय और संयोजक श्रीनारायण पांडे ने अतिथियों का स्वागत किया।

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