अल्पायु में असाधारण उपलब्धि
विश्व की सबसे कम आयु की अंतर्राष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया को मिला ‘लिटिल चैंपियन ऑफ द ईयर–2025’ सम्मान
अल्पायु में असाधारण उपलब्धि
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की वैश्विक पहचान
गोरखपुर।
धार्मिक–आध्यात्मिक क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुकी विश्व की सबसे कम आयु की अंतर्राष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई है। उन्हें 25वें ग्लोबल समिट एवं अवॉर्ड सेरेमनी में प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय सम्मान ‘लिटिल चैंपियन ऑफ द ईयर–2025’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान मानवाधिकार दिवस 2025 के अवसर पर उनके असाधारण व्यक्तित्व, मानवीय मूल्यों के प्रचार–प्रसार, सामाजिक संवेदना और वैश्विक सद्भाव के लिए दिए गए योगदान के लिए प्रदान किया गया।
अध्यात्म, संस्कार और साधना की यात्रा
उल्लेखनीय है कि अल्पायु में ही श्वेतिमा माधव प्रिया अब तक 26 श्रीमद्भागवत कथा महापुराण का शास्त्रसम्मत, भावपूर्ण और प्रभावशाली वाचन कर चुकी हैं। उनकी कथाओं में भक्ति, ज्ञान, करुणा, नैतिकता और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। सरल किंतु ओजस्वी वाणी में वे श्रोताओं को जीवन के उच्च मूल्यों से जोड़ने का कार्य करती हैं। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी उनके प्रवचनों को सराहा गया है, जिससे भारतीय सनातन आध्यात्मिक परंपरा की वैश्विक प्रतिष्ठा और अधिक सुदृढ़ हुई है।
परिवार, संस्कार और प्रेरणा
श्वेतिमा माधव प्रिया धरा धाम इंटरनेशनल एवं धरा धाम विश्व सद्भाव पीठ के प्रमुख, जगत धर्म चक्रवर्ती एवं सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ पाण्डेय तथा प्रसिद्ध समाजसेवी एवं देहदानी डॉ. रागिनी पाण्डेय की पुत्री हैं। बचपन से ही उन्हें सेवा, सद्भाव, करुणा और मानवता के संस्कार प्राप्त हुए। उनकी जन्मस्थली गोरखपुर है, जबकि वर्तमान में वे बृंदावन में निवास कर आध्यात्मिक साधना, शास्त्रीय अध्ययन और निरंतर अभ्यास में संलग्न हैं।
सम्मान और सामाजिक प्रभाव
सम्मान पत्र में श्वेतिमा माधव प्रिया के साहस, नेतृत्व क्षमता, मानवीय दृष्टिकोण और समाज के प्रति समर्पण की विशेष सराहना की गई है। इस उपलब्धि पर धर्म, संस्कृति, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों में हर्ष और गर्व का वातावरण है। प्रबुद्धजनों का कहना है कि ‘लिटिल चैंपियन ऑफ द ईयर–2025’ सम्मान न केवल श्वेतिमा माधव प्रिया की व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, सांस्कृतिक मूल्यों और विश्व शांति के संदेश को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नई ऊँचाइयाँ प्रदान करता है।
