*वरिष्ठ पत्रकार धर्मेन्द्र नारायण दुबे (टाटा जी) को अश्रुपूरित अंतिम विदाई, पुत्र ने दी मुखाग्नि*



गोरखपुर। गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ पत्रकार धर्मेन्द्र नारायण दुबे (टाटा जी) का 65 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से गोरखपुर के पत्रकारिता जगत में शोक की गहरी लहर दौड़ गई। हर आंख नम थी और हर दिल गमगीन।
बृहस्पतिवार को राजघाट स्थित राप्ती नदी के तट पर उनका अंतिम संस्कार पूरे सम्मान और अत्यंत भावुक माहौल में संपन्न हुआ। स्वर्गीय दुबे के एकलौते पुत्र धर्मेश नारायण दुबे ने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। जैसे ही मुखाग्नि दी गई, घाट पर मौजूद लोगों की आंखें छलक उठीं और वातावरण शोक से भर गया।
स्वर्गीय धर्मेन्द्र नारायण दुबे अपने पीछे तीन पुत्रियों और एक पुत्र से भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। वे मूल रूप से महुआ डाबर के निवासी थे, लेकिन लंबे समय से अपने परिवार के साथ मुगलहा मेडिकल कॉलेज के निकट सिटी हॉस्पिटल क्षेत्र में निवास कर रहे थे। वे काफी दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे और उनका इलाज जारी था, किंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनके निधन से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
स्वर्गीय दुबे चार भाइयों में सबसे बड़े थे तथा उनकी एक बड़ी बहन भी हैं। परिवार में वे एक अभिभावक, मार्गदर्शक और मजबूत स्तंभ के रूप में जाने जाते थे। उनकी सादगी, सरल स्वभाव और जिम्मेदारियों के प्रति निष्ठा ने उन्हें न केवल परिवार, बल्कि समाज में भी विशेष सम्मान दिलाया।
राजघाट पर अंतिम संस्कार के दौरान पत्रकारिता जगत से जुड़े वरिष्ठ व युवा पत्रकारों के साथ-साथ अधिवक्ता, समाजसेवी और शुभचिंतक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने अपने प्रिय वरिष्ठ पत्रकार, मार्गदर्शक और बड़े भाई धर्मेन्द्र नारायण दुबे (टाटा जी) को नम आंखों से श्रद्धासुमन अर्पित किए।
साथियों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि टाटा जी केवल एक पत्रकार नहीं, बल्कि अत्यंत संवेदनशील और मानवीय व्यक्तित्व के धनी थे। वे बिना बुलाए हर किसी के दुख में पहुंच जाते थे और अपने अपनत्व व व्यवहार से दुखों को बांटने का काम करते थे।
मिलनसार, हंसमुख और सरल स्वभाव वाले टाटा जी के लिए पत्रकारिता मात्र पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति दायित्व थी। उनके निधन से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा।
अंतिम विदाई के समय राप्ती तट पर उठती चिता की लपटों के साथ अनगिनत यादें भी सुलगती रहीं। हर कोई यही कहता नजर आया कि टाटा जी भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनकी सादगी, मुस्कान और मानवीय संवेदनाएं सदैव स्मृतियों में जीवित रहेंगी।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और शोकाकुल परिवार को इस असहनीय दुख को सहन करने की शक्ति दें।

By Minhajalisiddiquiali

गोरखपुर up53 सीएम सिटी

Leave a Reply

Discover more from Arushan News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading