गोरखपुर । गोरखपुर की सांस्कृतिक परंपरा सदैव समृद्ध और सृजनशील रही है। इसी अनुभूति को आत्मसात करते हुए डॉ. विमल कुमार मोदी के नेतृत्व में रंग महर्षि मंच की स्थापना की गयी है । जिसका उद्देश्य गोरखपुर की सांस्कृतिक विरासत को युवा कलाकारों को सजीव और सशक्त बनाया जा सके । इसी सांस्कृतिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए ‘रंगमहर्षि मंच’ एवं ‘गोरखपुर थिएटर’ के संयुक्त तत्वावधान में रैम्पस स्कूल के रत्न मेमोरियल प्रेक्षागृह में पद्मश्री भगवती चरण वर्मा की कालजयी कहानी ‘वसीयत’ की नाट्य प्रस्तुति अशोक श्रीवास्तव ‘महर्षि’ के निर्देशन में सफलतापूर्वक मंचन किया गया जिसने दर्शकों को हास्य एवं व्यंग के संवादों से दर्शको के हृदय को उद्वेलित कर दिया। कथा की मूल संवेदना और आत्मा को अक्षुण्य रखते हुए इसका नाट्यरूपांतरण राधेश्याम जी द्वारा अत्यंत सजीवता से देखने को मिला । पूरा नाटक कहानी के मुख्य पात्र चूड़ामणि मिश्र एक ऐसे वृद्ध पात्र के इर्द-गिर्द घूमता है, जो अपार संपत्ति का स्वामी है, जो अस्वस्थ और उपेक्षित जीवन जी रहा है। उसके पुत्र, बहुएँ और संबंधी उसकी अस्वस्थता से अधिक उसकी संपत्ति के बँटवारे को लेकर चिंतित दिखाई देते हैं। वृद्ध के जीवन, उसकी भावनाओं और उसकी पीड़ा के प्रति किसी में वास्तविक संवेदना नहीं रहती है । इस कटु यथार्थ को समझते हुए वृद्ध एक सूझबूझ भरा निर्णय लेता है—वह अपनी वसीयत को अपनी मृत्यु तक गोपनीय रखने का निश्चय करता है। यह निर्णय परिवारजनों के मुखौटे उतार देता है और उनके लालचपूर्ण चरित्र को उजागर कर देता है। नाटक के कलाकारों ने इस भावभूमि को अत्यंत जीवंतता और संवेदनशीलता के साथ अपने उत्कृष्ट अभिनय के माध्यम से मंच पर साकार किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. शिव शरण दास, विशिष्ट अतिथि पुष्पदंत जैन, विनीता श्रीवास्तव तथा संस्था के मुख्य संरक्षक डॉ. विमल कुमार मोदी सहित उपस्थित संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारियो के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि डॉ. शिव शरण दास ने अपने संबोधन में गोरखपुर रंगमंच की भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए नाटक के सफल मंचन पर रंगमहर्षि के समस्त कलाकारों एवं पधादिकरियो के प्रति अपनी शुभकामनायें दी । संस्था के वरिष्ठ सदस्य एवं अध्यक्ष अशोक श्रीवास्तव महर्षि ने सभी अतिथियों एवं दर्शकों का स्वागत किया एवं संस्था के मंत्री राकेश आर्य ने उपस्थित दर्शकजनों के प्रति आभार व्यक्त किया तथा कार्यक्रम का सफल संचालन अरुणांबुज आर्य ने किया। नाटक में प्रो. चूड़ामणि मिश्र की केंद्रीय भूमिका में वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल गौड़,नवनीत मिश्र (शिष्य ),राधेश्याम गुप्ता (बड़ा लड़का ),अमृत आनंद (छोटा लड़का ), शीलम राव (बड़ी बहु ) के साथ डिम्पल श्रीवास्तव ने अपने चरित्र को बखूबी निभाते हुए अपने उत्कृष्ट अभिनय का परिचय दिया , अन्य भूमिकाओ में युवा रंगकर्मी सौरभ चौधरी ,प्रिया गुप्ता,प्रियंका गौड़ ,पूर्णिमा आनंद ,कुलदीप भानुवंशी ,श्रेयांश सिंह , अखिलेश कसौधन,विजय सिंह ने भी नाटक में अपने चरित्र को सजीव अभिनय से दर्शको को आकृष्ट कर दर्शको के प्रशंसा के पात्र बने । पार्श्व संगीत में दुर्गेश कुमार, प्रकाश संयोजन में अशोक श्रीवास्तव महर्षि, रूप सज्जा में राधेश्याम तथा मंच सज्जा में सुमित श्रीवास्तव का योगदान प्रशंसनीय रहा। नाट्य मंचन को सफल बनाने में संस्था के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. सुरेश श्रीवास्तव , डॉ. राकेश कुमार, डॉ. अलोक गुप्ता, डॉ. जे के लाल , अरविन्द चन्द, डॉ. ए पी गुप्ता , मान्धाता सिंह , सनी सिंह ,अभयजीत उपाध्याय, प्रबोध श्रीवास्तव , उमेश श्रीवास्तव बेचन सिंह,राकेश कुमार आदि सहित नगर के नाट्य दर्शक भारी संख्या में उपस्थित होकर नाटक को सफल बनाया ।

Leave a Reply

Discover more from Arushan News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading