ईद आज : चांद रात में चहल-पहल व रोशनी से गुलजार रहा बाजार अल्लाह की इबादत में गुजरा अलविदा जुमा
गोरखपुर। माह-ए-रमजान के आखिरी जुमा की नमाज शहर की सभी मस्जिदों में दोपहर 12:30 से लेकर 2:30 बजे तक अदा की गई। मुल्क में अमन, शांति, मुहब्बत व भाईचारे की दुआ मांगी गई। रोजेदारों ने अलविदा के दिन नमाज पढ़ी। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की। दुरूद ओ सलाम का नजराना पेश किया। गुनाहों की माफी मांगी। अलविदा जुमा के मौके पर ईद जैसा माहौल नज़र आया। घरों में महिलाओं ने नमाज, तिलावत-ए-कुरआन व तस्बीह कर अल्लाह से दुआ मांगी।
एक महीने तक रोजा रखने के बाद आखिर वह मौका आ गया है जिसका हर मुसलमान को बेसब्री से इंतजार रहता है। शुक्रवार की शाम रोजेदारों ने रमजान का 30वां रोजा अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए खोला। इसके बाद अपने-अपने घरों की छतों से ईद के चांद का दीदार किया। चांद के दीदार की दुआ पढ़ी। उलमा किराम ने ईद के चांद (शव्वाल माह) की औपचारिक घोषणा कर मुबारकबाद पेश की। ईद-उल-फित्र का त्योहार अल्लाह का तोहफा है जो शनिवार 21 मार्च को मुहब्बत, अकीदत, रवायत व अमन ओ अमान के साथ मनाया जाएगा। सुबह सात बजे से ईद की नमाज अदा की जाएगी। ईद की आखिरी नमाज सुन्नी जामा मस्जिद सौदागर मोहल्ला बसंतपुर में सुबह 10 बजकर 30 मिनट पर अदा की जाएगी। सभी ईदगाहों व मस्जिदों में तैयारियां मुकम्मल हैं। साफ-सफाई पूरी हो चुकी है। शहर काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी, मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन मन्नानी, मौलाना गुलाम हुसैन अजीजी, मुफ्ती मेराज अहमद कादरी, कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, हाफिज रहमत अली निजामी, मौलाना महमूद रजा कादरी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद, नेहाल अहमद, हाजी फैज अहमद खान, हाजी खुर्शीद आलम खां, नजीर अहमद सिद्दीकी, मुहम्मद आजम, मो. अदहम, शहबाज सिद्दीकी, ताबिश, शीराज आदि ने अवाम को ईद की मुबारकबाद पेश की है।
चांद रात में लोगों ने एक दूसरे को ईद मुबारक कहा। मुबारकबाद देने का सिलसिला पूरी रात चलता रहा। लोगों ने एक दूसरे को मोबाइल व सोशल मीडिया के जरिए भी ईद की मुबारकबाद पेश की। विदेश में रह रहे परिजनों ने भी मुबारकबाद पेश की और हालचाल जाना। फेसबुक, व्हाट्सएप्प, इंस्ट्राग्राम, एक्स आदि पर लोग विभिन्न संदेशों के जरिए ईद की मुबारकबाद पेश करते दिखे।
शहर की विभिन्न मस्जिदों में एतिकाफ पर बैठे रोजेदार अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए मस्जिद से बाहर निकले। वहीं अकीदतमंदों ने चांद रात में खूब इबादत की। नमाज पढ़ी। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की। ईद की रात के बहुत से फजाइल हदीस में आए हैं इसलिए बहुत से लोग जागकर इबादत कर मुकद्दस संवारने की दुआ करते रहे। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में तो खुशियां ही खुशियां नज़र आईं। हर घर के बच्चे चहकते दिखे। सभी ईद का इस्तकबाल करते नजर आए।
रहमतनगर, तुर्कमानपुर, नखास, जाफरा बाजार, चक्शा हुसैन, गोरखनाथ, जाहिदा बाद, रसूलपुर, रेती, इलाहीबाग, खूनीपुर, मियां बाजार आदि क्षेत्रों में तो एक खुशी, रोशनी व चहल पहल की नई ऊर्जा देखने को मिली।
रात में ईद की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया। चांद रात के इंतजार कर रहे बाजार में खुशी की नई चमक दिखी। शाह मारूफ, नखास, रेती, घंटाघर, उर्दू बाजार, गोरखनाथ, जाफरा बाजार, गीता प्रेस रोड में तो भीड़ उमड़ पड़ी। सारी दुकानें रात भर खुली रही और हर दुकान पर भीड़ दिखी। फुटपाथ पर दुकानें सजीं व भीड़ से पटी दिखी।
दुकानदारों ने चांद रात में काफी रियायत भी दे रखी थी। छूट का माल बेहद कम दामों में आदि आवाज़ें बार-बार कानों से टकरा रहीं थीं। पुरुष, महिला, युवा, बच्चे, बुजुर्ग सभी थे बाज़ार में। सभी की एक ख्वाहिश थी कि चांद रात में कुछ न कुछ चीज जरूर खरीदी जाए।
शाह मारूफ, नखास, रेती, जाफरा बाजार , जाहिदाबाद तो पूरी रात अमीनाबाद बना रहा। भीड़ इस कदर की चलना मुश्किल हो रहा था। यहां सजी कई दर्जन दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी थी। कहीं कुर्ता पायजामा, टोपी, इत्र, रुमाल बिक रहा था तो कहीं रेडीमेड बच्चों के कपड़े। महिलाओं की जरुरतों के लिए भी यहां सब चीजें मौजूद थीं। महिलाओं का हुजूम चूड़ी, ज्वैलरी, चप्पल की दुकानों व दुपट्टा गली में नजर आया। लिपिस्टिक, नेल पॉलिश से लेकर कड़ा, ब्रेसलेट्स, पर्स सभी मिल रहा था। शीशे के बेशुमार आइटम बिक रहे थे। लोग गिलास कटोरी, दस्तरख्वान ज्यादा खरीद रहे थे। बच्चे नौजवान पर्स, चश्मा, बेल्ट आदि की दुकानों पर नज़र आ रहे थे। जूता चप्पल की दुकानें भरी पड़ी थी। जाफरा बाज़ार में भी खूब भीड़ उमड़ी। लोग गरीब मुसलमानों में सदका-ए-फित्र भी पहुंचाते दिखे। कपड़ा लेने के लिए दर्जियों के यहां भीड़ उमड़ पड़ी। दर्जियों की दुकानें देर रात तक खुली रही।
सेवईं की खरीदारी नखास, उर्दू बाजार, जाफरा बाजार, गोरखनाथ आदि जगहों से जमकर हुई। वहीं खोवा भी खूब बिका। खोवा मंडी गोलघर के अलावा नखास, जाफरा बाजार, इलाहीबाग, खोखर टोला आदि जगहों पर खोवा बिक रहा था। मेवा भी खूब बिका।
इसी तरह मटन व चिकन शॉप पर मीट खरीदने वालों की लाइन नज़र आई। त्योहार की वजह से मीट का रेट दुकानदारों ने बढ़ा दिया था उसके बावजूद खरीदारी में कोई कमी नज़र नहीं आई। पूरी रात मीट बिकता रहा।
उलमा किराम ने ईद की मुबारकबाद के साथ कहा
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी व कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने जिन त्योहारों के जरिए विषमता को दूर कर एक समरस समाज बनाने की कोशिश की उनमें ईद-उल-फित्र की खास अहमियत है। जकात एवं सदक-ए-फित्र की व्यवस्था सामाजिक न्याय एवं आर्थिक विपन्नता को ध्यान में रखकर ही की गई है। रमजान में सदका-ए-फित्र व जकात देने का जो मकसद है वह साफ-साफ इस बात की ओर इशारा करता है कि ईद का चांद निकलने से पहले हर व्यक्ति अपनी जरूरत की चीजें हासिल कर ले जिससे वह ईद की खुशी का लुत्फ उठा सके।
मरकजी नूरी जामा मस्जिद चक्शा हुसैन के इमाम मौलाना गुलाम हुसैन अजीजी ने कहा कि रमजान का महीना हमारी प्रशिक्षण के लिए आया था ताकि हम साल के अन्य महीनों में अल्लाह के फरमाबरदार बनकर जिंदगी गुजारें। कुरआन-ए-पाक की तिलावत करें और उसके हुक्म पर जिंदगी गुजारें। रमजान का महीना रहमत व बरकत से मामूर है। रमजान का महीना हमें गुनाहों से पाक करने के लिए आया था।
