इस्लाम शब्द का मूल अर्थ शांति और समर्पण है : डॉ. रुहुल अमीन
हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमा का रूहानी उत्सव (उर्स) शुरु
गोरखपुर। नार्मल स्थित दरगाह पर हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमा का सालाना तीन दिवसीय रूहानी उत्सव (उर्स-ए-पाक) बुधवार को जलसा-ए-ईद मिलादुन्नबी के साथ शुरू हुअा। रूहानी उत्सव में मुस्लिम समुदाय के अलावा अन्य धर्मो के लोगों ने शिरकत कर तरक्की, अमन ओ अमान व खुशहाली की दुआ मांगी। भोर में गुस्ल एवं संदल पोशी की रस्म हुई। दरगाह पर लगे मेले का सभी ने लुत्फ उठाया। जलसे में उलमा किराम को सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि अतिथि मध्य प्रदेश के डॉ. रुहुल अमीन ने कहा कि इस्लाम जीवन जीने का एक ऐसा तरीका है जो इंसान को आत्मिक सकून और समाज में प्रेम व सम्मान के साथ रहने की शिक्षा देता है। इस्लाम शब्द का मूल अर्थ ही शांति और समर्पण है। हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमा का पैगाम मुख्य रूप से अल्लाह व रसूल से प्रेम, इंसानियत, भाईचारा और सेवा पर आधारित था। आपने तौहीद, सादगी, शांति, सद्भाव, गंगा-जमुनी तहजीब और लोगों के दिलों को जीतने का संदेश दिया, जो आज भी प्रासंगिक है। आपके पैगाम ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने और प्रेम का संदेश फैलाने में मदद की, जो आज भी आपकी दरगाह पर देखा जा सकता है। इस्लाम में जाति, रंग या सामाजिक स्थिति का कोई भेदभाव नहीं है। इस्लाम में अल्लाह की दया का द्वार हमेशा खुला रहता है। अल्लाह की रहमत से निराश न हों, वह सभी गुनाहों को माफ कर देता है। शरीअत से हट कर कोई काम बिल्कुल भी न करें। एक बनें, नेक बनें। आधी रोटी खाकर भी बच्चों को पढ़ाना पढ़े तो भी बच्चों को शिक्षा जरुर दिलवाएं। हजरत मुबारक खां शहीद अलैहिर्रहमा से अकीदत रखने वाले लोग मदरसा, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी, अस्पताल, यतीमखाना, लंगरखाना आदि खोलें। समाज सेवा के काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।
दरगाह सदर इकरार अहमद ने कहा कि हजरत मुबारक खां शहीद का मानना था कि मानवता की सेवा करना ही अल्लाह तआला की सच्ची सेवा है। आपकी दरगाह के दरवाजे अमीर-गरीब, हिंदू-मुस्लिम सभी के लिए खुले हैं। आपने तौहीद, इश्क-ए-इलाही और इंसानियत को सर्वोपरि रखा। आपने हमेशा सादगी पर जोर दिया और दुनियावी लालच से दूर रहने की शिक्षा दी। आपकी दरगाह आज भी गंगा-जमुनी तहजीब की एक बड़ी मिसाल है।
जलसे में इकरार अहमद, हाजी खुर्शीद आलम खान, हाजी कलीम फरजंद, सैयद शहाब अहमद, शमशीर अहमद शेरु, अहमद हसन, मुहम्मद कुतुबुद्दीन, रमजान खान, मौलाना वसीम अख्तर अजीजी, कारी अफजल बरकाती, मुफ्ती अख्तर हुसैन मन्नानी, मुफ्ती मुनव्वर रजा, मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही, एजाज अहमद, रईस अनवर, कारी नसीमुल्लाह, हाफिज नजरे आलम कादरी, मौलाना जहांगीर अहमद अजीजी, मुफ्ती अलाउद्दीन, अब्दुल्लाह हमजा खान,इमरान, बाबी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
आज का कार्यक्रम
गुरुवार 16 अप्रैल को फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी होगी। सुबह 9:00 बजे से महफिल-ए-मिलाद व दोपहर 12:15 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की जाएगी। शाम की नमाज (मगरिब) के बाद सरकारी चादर व गागर का पारंपरिक जुलूस मियां बाजार से इरशाद बग्गी वाले के मकान से निकाला जाएगा। जो विभिन्न मार्गों से होता हुआ दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल पर पहुंचेगा। मजार शरीफ की चादरपोशी की जाएगी। रात की नमाज के बाद मशहूर कव्वाल अजमत आफताब वारसी व उत्तराखंड के कव्वाल इंतेज़ार साबरी कव्वाली पेश करेंगे।



