खानकाह हज़रत मिस्कीन शाह के 87वें उर्स-ए-पाक का दूसरा दिन अकीदत, मोहब्बत और आपसी भाईचारे के नाम रहा, सरकारी चादर का जुलूस शानो-शौकत से निकला
गोरखपुर, 29 अक्टूबर 2026 (भारत समाचार)। गोरखपुर के अंधियारीबाग स्थित ऐतिहासिक खानकाह हज़रत मियाँ मोहम्मद नियाज़ बहादुर शाह उर्फ़ मिस्कीन शाह रहमतुल्लाह अलैह के 87वें उर्स-ए-पाक के दूसरे दिन गुरुवार को धार्मिक एवं रूहानी कार्यक्रमों का आयोजन अकीदत और एहतराम के साथ किया गया।
कार्यक्रम का आगाज़ सुबह कुरआनख्वानी, उलमा-ए-इकराम की तकरीर और सलात-ओ-सलाम से हुआ। इस दौरान उलमा-ए-इकराम ने फातिहा पढ़कर मुल्क में अमन-चैन, तरक्की, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआएं मांगीं।
इसके बाद दिन में रहमतनगर स्थित खानकाह के गद्दीनशीन एवं मुख्य ट्रस्टी हज़रत फिरोज अहमद मिस्कीनी निहाली चिश्ती निज़ामी के आवास से परंपरागत सरकारी चादर का जुलूस बड़ी शानो-शौकत के साथ निकाला गया। जुलूस में सर्वधर्म समभाव और गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत मिसाल देखने को मिली। इसमें विभिन्न धर्मों के लोगों सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद और स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
जुलूस खोखर टोला, ऊंचवा और बेनीगंज होते हुए अंधियारीबाग स्थित खानकाह के निकट पहुंचा। यहां उपाध्यक्ष ई. मिन्नत गोरखपुरी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोगों ने गद्दीनशीन एवं मुख्य ट्रस्टी हज़रत फिरोज अहमद मिस्कीनी निहाली चिश्ती निज़ामी, सदर-ए-आला एवं अध्यक्ष अशफाक हुसैन मेकरानी तथा कलकत्ता से आए मुमताज अली का फूल-मालाओं और शॉल से भव्य स्वागत किया। इस दौरान फूलों की वर्षा कर जुलूस की अगवानी की गई और गुलपोशी के साथ सभी का अदब-ओ-एहतराम से इस्तकबाल किया गया।
इसके पश्चात जुलूस खानकाह परिसर पहुंचा, जहां सरकारी चादर पेश की गई। अकीदतमंदों ने मजार शरीफ पर गुलाब की पंखुड़ियां, इत्र और गुलाबजल पेश कर अपनी अकीदत का इजहार किया। इस मौके पर मुल्क की तरक्की, कौम की खुशहाली, आपसी सौहार्द और पूरी इंसानियत की भलाई के लिए विशेष दुआ मांगी गई।
इस अवसर पर सुधा मोदी, विजय श्रीवास्तव, डॉ. अभय पाल सिंह,हसन जमाल बाबुआ भाई,जमाल समानी,शब्बीर,सैय्यद हुसैन,डॉ स्वामी विनय,शिवा,संजय श्रीवास्तव,सुधीर श्रीवास्तव (भोजपुरी फिल्म अभिनेता )
सुमन झा(कवियित्री)
राम जी,सैय्यद अख्तर हुसैन
प्रिंस रजक सहित अनेक गणमान्य लोग, सामाजिक कार्यकर्ता,खानकाह के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।खानकाह का यह आयोजन एक बार फिर गोरखपुर की साझा संस्कृति, धार्मिक सद्भाव और आपसी मोहब्बत का पैगाम देता नजर आया।

By Minhajalisiddiquiali

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