गोरखपुर, । दिग्विजयनाथ पीजी कॉलेज, गोरखपुर के राजनीति विज्ञान विभाग एवं भारतीय वैश्विक परिषद (आईसीडब्ल्यूए), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में ‘ग्लोबल सप्लाई चेन्स एंड इंडियन फॉरेन पॉलिसी’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन हुआ। संगोष्ठी में श्रीलंका, चीन, ताजिकिस्तान, नेपाल, घाना सहित भारत के उत्तर प्रदेश, असम, बिहार, उत्तराखंड और महाराष्ट्र आदि राज्यों से लगभग 210 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। विशिष्ट अतिथि प्रो. रिपुसूदन सिंह, आचार्य, बाबा साहब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ ने कहा कि ऊर्जा संकट आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला भारतीय विदेश नीति का अभिन्न अंग बन चुकी है। उन्होंने कहा कि चीन पर वैश्विक निर्भरता कम करने के लिए भारत एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रहा है। भारत की कुशल श्रमशक्ति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और विशाल उपभोक्ता बाजार विदेशी कंपनियों को आकर्षित कर रहे हैं। उन्होंने मल्टी-अलाइनमेंट और रणनीतिक स्वायत्तता को भारत की विदेश नीति की महत्वपूर्ण विशेषता बताया। मुख्य अतिथि काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी के राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. तेज प्रताप सिंह ने ग्लोबल सप्लाई चेन की सैद्धांतिक व्याख्या करते हुए कहा कि वैश्वीकरण के दौर में कोई भी उत्पाद पूरी तरह एक देश में निर्मित नहीं होता। उन्होंने आत्मनिर्भरता, तुलनात्मक लाभ और आपूर्ति श्रृंखला के हथियारीकरण पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत को चीन पर निर्भरता कम करते हुए वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि ग्लोबल सप्लाई चेन अब केवल व्यापार का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति और विदेश नीति का केंद्रीय विषय बन गई है। भारत के लिए यह चुनौती के साथ बड़ा अवसर भी है। कार्यक्रम का संचालन डॉ. त्रिभुवन मिश्रा ने किया। संगोष्ठी संयोजक डॉ. इन्द्रेश कुमार पाण्डेय सहित डॉ. शैलेश कुमार सिंह, डॉ. सुनील कुमार सिंह, डॉ. प्रियंका सिंह, डॉ. अखिल श्रीवास्तव, डॉ. पवन पाण्डेय, शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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