सौहार्द शिरोमणि संत सौरभ को घाना में मिला अंतरराष्ट्रीय गौरव सम्मान

विश्व शांति, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक समरसता में उल्लेखनीय योगदान के लिए दक्षिण अफ्रीका के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय ने किया सम्मानित

गोरखपुर। विश्व शांति, धार्मिक सद्भाव और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित कार्यों के लिए भारत के प्रतिष्ठित समाजसेवी सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ को घाना के 68वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में “घाना के 68वें स्वतंत्रता दिवस सम्मान” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें घाना के विकास, स्वतंत्रता आंदोलन और सामाजिक उत्थान में उनके अमूल्य योगदान, सहभागिता और समर्थन के लिए प्रदान किया गया।

इस प्रतिष्ठित सम्मान को दक्षिण अफ्रीका के प्रसिद्ध शिक्षण संस्थान भविष्यवाणी बाइबल विश्वविद्यालय, वेलिंगटन द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम में घाना और दक्षिण अफ्रीका के कई प्रसिद्ध शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे प्रतिष्ठित समाजसेवी एवं शिक्षाविद प्रोफेसर डी.एल.के. फिलिप्स (दक्षिण अफ्रीका), प्रोफेसर किर्चोल्ट ओबेंग (घाना) और डॉ. ओरारिस (घाना) ने संत सौरभ को इस सम्मान से नवाजा।

सम्मान पत्र में “स्वतंत्रता” और “आज़ादी” के प्रतीकात्मक उल्लेख के साथ डॉ. सौरभ के वर्षों के उल्लेखनीय योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई।

धार्मिक सौहार्द और सेवा के क्षेत्र में विशेष योगदान

सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर धार्मिक एकता, सौहार्द और समाज सेवा के लिए समर्पित हैं। वे “धरा धाम इंटरनेशनल” के संस्थापक हैं, जो सभी धर्मों के अनुयायियों को एक मंच पर लाकर विश्व शांति का संदेश देने का एक अनूठा प्रयास है।

डॉ. सौरभ वर्षों से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण अभियान, वंचित बच्चों के लिए शिक्षा अभियान और युवाओं को नशामुक्ति के लिए जागरूक करने जैसे कई सामाजिक अभियानों का नेतृत्व किया है। इसके अलावा, उन्होंने ‘हरियाली शादी’ जैसी अभिनव पहल से पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देने का भी प्रयास किया है।

सम्मान के दौरान डॉ. सौरभ के विचार

सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. सौरभ ने इसे भारत के गौरव और विश्व शांति के लिए समर्पित करते हुए कहा,

“यह सम्मान केवल मेरा नहीं है, बल्कि उन सभी का है जो समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए समर्पित हैं। मैं इसे भारत और विश्व शांति को समर्पित करता हूं।”

उन्होंने आगे कहा कि उनके प्रयासों का उद्देश्य विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच सद्भाव स्थापित कर वैश्विक शांति को बढ़ावा देना है।

भारत का बढ़ा मान

इस प्रतिष्ठित सम्मान के मिलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को मजबूती मिली है। संत सौरभ के इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को न केवल उनके अनुयायियों बल्कि समाज के हर वर्ग ने सराहा है।

यह सम्मान भारत के लिए गर्व का विषय है, जिसने विश्व मंच पर मानवीय मूल्यों, सेवा और सौहार्द का परचम लहराया है।

By Minhajalisiddiquiali

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