अरुशान न्यूज।गोरखपुर। उत्तराखंड में कई शिवालय हैं, जहां लोगों की अटूट आस्था है. उन्हीं में से एक जागेश्वर धाम भी है, जहां शिवत्व का अहसास होता है. जागेश्वर धाम को भगवान भोलेनाथ की तपोस्थली भी माना जाता है. माना जाता है कि सबसे पहले लिंग के रूप में महादेव की पूजा की परंपरा यहीं से शुरू हुई थी।भगवान शिव व सप्तऋषियों ने की थी तपस्या मंदिर का पौराणिक महत्व होने के कारण लोगों की अगाध श्रद्धा का केंद्र है. बाबा जागेश्वर धाम(Jageshwar Dham) में सावन माह में पूजा-अर्चना करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है. यहां मुख्य मंदिरों में योगेश्वर मंदिर, चंडी का मंदिर,कुबेर मंदिर,मृत्युंजय मंदिर,नव दुर्गा मंदिर नवग्रह मंदिर, पिरामिड मंदिर, पुष्टि देवी मंदिर, लकुलीश मंदिर, बालेश्वर मंदिर, केदारेश्वर मंदिर शामिल हैं. भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी इसी मंदिर में फलित माना जाता है. मान्यता है कि यहां भगवान शिव व सप्तऋषियों ने भी तपस्या की थी. इसलिए मंदिर में महामृत्युंजय मंत्र का जाप कराने लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं।पीएम मोदी ने किया दर्शन और पूजन: जागेश्वर धाम अल्मोड़ा जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर है. जागेश्वर धाम देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित हैं. जहां श्रद्धालुओं को शांति और अलौकिक शक्ति का अहसास होता है. जागेश्वर धाम में मंदिर समूह देखने को मिलता है, यहां 124 छोटे और बड़े मंदिरों का समूह है. जिस कारण अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर मंदिर समूह अपनी वास्तुकला के लिए देश- विदेश में प्रसिद्ध है. जहां साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.मंदिर के बारे कहा जाता है कि कत्यूरी शासकों ने मंदिर का निर्माण कराया था. पिछले साल 12 अक्टूबर को इस मंदिर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी विशेष पूजा अर्चना की थी. जिससे कुमाऊं मंडल में पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।

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