*‘‘टीबी उन्मूलन में निक्षय मित्रों की भूमिका अहम’पिपरौली सीएचसी ने पचीस टीबी मरीजों को गोद लिया

सीएमओ और सहयोगियों द्वारा मरीजों को वितरित की गई पोषण पोटली

*गोरखपुर।* पिपरौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के चिकित्सकों और स्टॉफ ने पचीस टीबी उपचाराधीन मरीजों को गोद लेकर उनकी देखभाल का संकल्प लिया है। इस सिलसिले में सीएचसी में सोमवार को आयोजित टीबी एडॉप्शन कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ राजेश झा भी पहुंचे। उनकी उपस्थिति में गोद लिये जा रहे टीबी उपचाराधीन मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। सीएमओ ने खुद कई मरीजों को पोटली दी और सभी उपचाराधीन मरीजों से अपील की कि वह दवा के साथ खानपान का भी विशेष ध्यान रखें। इस अवसर पर डॉ झा ने कहा कि टीबी उन्मूलन में निक्षय मित्रों की अहम भूमिका है, जो टीबी उपचाराधीन मरीजों को गोद लेकर उनकी देखभाल कर रहे हैं।

सीएमओ ने कहा कि टीबी उपचाराधीन मरीजों को गोद लेने वाले निक्षय मित्रों को उपचार चलने तक मरीज के सुपोषण और फॉलो अप में मददगार बनना होता है। मरीज की दवा बीच में बंद न हो, उसे सुपोषित खानपान मिल सके और सामाजिक योजनाओं का लाभ मिल सके, यह जिम्मेवारी निक्षय मित्र को निभानी होती है। बेहतर कार्य करने वाले निक्षय मित्रों को समय समय पर सम्मानित भी किया जाता है। यह एक स्वैच्छिक कार्य है जिससे समाज में टीबी के प्रति व्याप्त कलंक और भेदभाव की प्रवृत्ति को नियंत्रित किया जा सकता है। समाज के सभी प्रमुख वर्गों के लोगों को चाहिए कि वह कमजोर आय वर्ग के टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए आगे आएं ताकि इस बीमारी का शीघ्र उन्मूलन किया जा सके।

डॉ झा ने बताया कि गोद लिये गये मरीज को पोषण पोटली में फल, मूंगफली, गुड़, चना आदि पोषक सामग्री इलाज चलने तक प्रति माह कम से कम एक बार देना चाहिए। टीबी मरीज के खानपान में प्रोटीन युक्त आहार की महत्वपूर्ण भूमिका है और इस आहार को सुनिश्चित करने के लिए ही सरकार प्रत्येक टीबी मरीज को इलाज चलने तक एक हजार रुपये प्रति माह की दर से पोषण सहायता राशि दे रही है। निक्षय मित्र अत्यंत जरूरतमंद मरीजों को अतिरिक्त सहायता देकर उनके पोषण स्तर में सुधार के सहयोगी बन सकते हैं।  साथ मरीज से नियमित हालचाल भी लेते रहना चाहिए। ऐसा करने से मरीज का मनोबल बढ़ता है और इलाज के बीच में वह दवा लेना बंद नहीं करता है। इससे वह खुद तो टीबी मुक्त होता ही है, साथ में समाज से भी टीबी संक्रमण का खतरा टल जाता है।

इस अवसर पर प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ एसएन मिश्रा, चिकित्सा अधिकारी डॉ अंजू लता, डॉ नीतू तिवारी, डॉ प्रियंका शाही, एसटीएस रत्नेश श्रीवास्तव, महेश अग्रहरि, फार्मासिस्ट राजा राम मौर्या, एक्स रे टेक्निशियन धर्मेंद्र सिंह, लैब टेक्निशियन मुंशीलाल गुप्ता और टीबी चैम्पियन सौम्या राव ने विशेष सहयोग किया। कार्यक्रम में ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर सुनीता विल्सन, बीसीपीएम शिव बहादुर यादव, स्वास्थ्यकर्मी सुनील, चंद्र लाल, सतेंद्र शुक्ला, अरूण गौतम और सुजीत सिंह भी मौजूद रहे।

*प्रसव कक्ष स्थानांतरित करने को कहा*

टीबी मरीज एडॉप्शन कार्यक्रम के बाद सीएमओ डॉ राजेश झा ने पिपरौली सीएचसी का निरीक्षण भी किया। उन्होंने उपस्थिति पंजिका की जांच की। साथ ही उन्होंने लैब, फार्मेसी, लेबर रूम और विभागीय कार्यालयों को देखा। उन्होंने प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को सीएचसी के लेबर रूम को अतिशीघ्र बेहतर जगह पर स्थानांतरित करने को कहा। उन्होंने प्रसूताओं को दिये जाने वाले भोजन को भी देखा। सीएमओ ने बताया कि अपने पिछले दौरे में फार्मेसी को लेकर जो सुझाव उन्होंने दिये थे, उसे सीएचसी पर लागू करा दिया गया है।

By Minhajalisiddiquiali

गोरखपुर up53 सीएम सिटी

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