मुस्कुराते हुए सलाम कर एक दूसरे की खैरियत पूछें : नायब काजी
गोरखपुर। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में सुन्नत के मुताबिक मुलाकात का तरीका विषय पर संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत व नात-ए-पाक हाफिज रहमत अली निजामी ने पेश की।
मुख्य वक्ता नायब काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि किसी भी मुसलमान से मुलाकात होने पर अस्सलामु अलैकुम (आप पर सलामती हो) कहकर सलाम करना सुन्नत है। यह सबसे महत्वपूर्ण अभिवादन है, जिसे जान-पहचान वाले और अनजान, दोनों को कहना चाहिए। सलाम के साथ हाथ मिलाना सुन्नत है। सलाम के साथ मुस्कुराना भी सुन्नत है, जो मुलाकात को और भी सौहार्दपूर्ण बनाता है। हदीस में बताया गया है कि जब दो मुसलमान मिलते हैं और हाथ मिलाते हैं, तो उनके अलग होने से पहले उनके गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। मिलने पर एक-दूसरे के बारे में, उनके परिवार के बारे में खैरियत मालूम करनी चाहिए। मुलाकात के दौरान अच्छी, भली और सकारात्मक बातें करनी चाहिए, जो सामने वाले में ऊर्जा और प्रेरणा पैदा करे। जब दूसरा व्यक्ति बात कर रहा हो, तो उसकी बात को ध्यान से सुनना चाहिए, न कि उसकी बात काटकर अपनी बात शुरु कर देनी चाहिए। किसी के चेहरे पर बहुत देर तक नजरें गड़ाकर बात नहीं करनी चाहिए। मुलाकात के दौरान हमेशा अच्छी और भली बातें करनी चाहिए, जिससे सामने वाले के दिल में अच्छा महसूस हो। जहां तक संभव हो बैठकर बात करना बेहतर माना जाता है, खासकर खाते-पीते समय। मुलाकात खत्म करते समय भी सलाम करना उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि शुरुआत में। इन शिष्टाचारों का पालन करना न केवल सुन्नत है, बल्कि इससे आपसी मुहब्बत और भाईचारा भी बढ़ता है।
अंत में दरूदो सलाम पढ़कर देश में अमन व अमान की दुआ मांगी गई। संगोष्ठी में कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, नेहाल अहमद नक्शबंदी, मुजफ्फर हसनैन रूमी, हाजी बदरूल, एसएफ अहमद, आसिफ महमूद नक्शबंदी, मुहम्मद आसिफ, रूशान, जावेद, जीशान आदि मौजूद रहे।
