हफ्ते की ईद रोजेदारों ने अल्लाह की रजा में गुजारी
रमजानुल मुबारक का दूसरा जुमा
गोरखपुर। रमजानुल मुबारक के दूसरे जुमा की नमाज शहर की छोटी-बड़ी तमाम मस्जिदों में दोपहर 12:30 से 2:30 बजे तक अदा की गई। मुल्क में शांति, तरक्की व भाईचारे की दुआ मांगी गई। रहमत का अशरा जारी है। रमजानुल मुबारक का नौवां रोजा व दूसरा जुमा अल्लाह की इबादत में गुजरा। फर्ज व सुन्नत नमाजों के साथ कसरत से नफ्ल नमाज अदा की गई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हुई। हफ्ते की ईद रोजेदारों ने अल्लाह की रजा में गुजारी।
रोजेदारों ने सुबह सहरी खाई। पुरुषों ने मस्जिदों में तो महिलाओं ने घरों में नमाज-ए-फज्र अदा की। इसके बाद कुरआन-ए-पाक की तिलावत की गई। इसके बाद कुछ आराम करने के बाद हफ्ते की ईद यानी जुमा के नमाज की तैयारी शुरु हो गई। लोगों ने गुस्ल किया। साफ सुथरे कपड़े पहने। इत्र लगाया। टोपी पहनी। जुमा की अजान होने तक मस्जिदें नमाजियों से भर गई। इसके बाद नमाजियों ने सुन्नत नमाज अदा की। इमामों ने अवाम को संबोधित किया। मदीना मस्जिद रेती में मुफ्ती मेराज अहमद कादरी, गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मोहम्मद अहमद निजामी, शाही मस्जिद तकिया कवलदह में हाफिज आफताब आलम, सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद, नूरी मस्जिद तुर्कमानपुर में मौलाना असलम रजवी, चिश्तिया मस्जिद बक्शीपुर में मौलाना महमूद रजा सहित तमाम मस्जिदों के इमाम ने रोजा, नमाज, मगफिरत के अशरा, फित्रा, जकात आदि पर बयान किया। मस्जिदों के इमाम ने मिम्बर पर खड़े होकर अल्लाह की हम्द ओ सना बयान की। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर दुरूद ओ सलाम पेश किया। खुलफा-ए-राशिदीन व अहले बैत का जिक्र किया। जुमा की नमाज अदा की गई। इमाम के साथ सभी ने अल्लाह के बारगाह में दुआ के लिए हाथ उठाए। इमाम की दुआ पर सभी ने आमीन की सदा बुलंद की। इसके बाद सभी ने सुन्नत नमाज अदा की। मिलकर दुरूद ओ सलाम पढ़ा गया। घरों में महिलाओं ने नमाज अदा की। कुरआन-ए-पाक की तिलावत की।
इसके बाद इफ्तारी की तैयारी शुरु हो गई। शाम को असर की नमाज पढ़ी गई। लजीज खानों से दस्तरख्वान सज गए। इफ्तार के समय सबने अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए रोजा खोला। मगरिब की नमाज अदा की। फिर थोड़ा चाय नाश्ता किया। इसके बाद एशा, तरावीह व वित्र की नमाज अदा की।
माह-ए-रमजान का पहला अशरा रहमत का शनिवार 28 फरवरी की शाम समाप्त हो जाएगा। दूसरा अशरा मगफिरत (गुनाहों की माफी) का शुरु होगा। वहीं दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल, शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह, दरोगा साहब मस्जिद अफगान हाता में तरावीह की नमाज के दौरान एक कुरआन-ए-पाक पूरा हुआ। हाफिज-ए-कुरआन को तोहफों व दुआओं से नवाजा गया।
अल्लाह रोजेदारों को रहमतों से नवाजता है : हाफिज रहमत अली
सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के इमाम हाफिज रहमत अली निजामी ने बताया कि दीन-ए-इस्लाम के पांच बुनियादी रुक्न (हिस्सा) में रोजा भी एक है और इस अमल के लिए माह-ए-रमजान मुकर्रर किया गया। अल्लाह तआला इबादत गुजार रोजेदार बंदे को बदले में रहमतों और बरकतों से नवाजता है। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान है कि जो मुकद्दस रमजान में किसी मजलिस-ए-जिक्र में शिरकत करता है, अल्लाह उसके हर-हर कदम के बदले में एक-एक साल की इबादत का सवाब लिखता है। कयामत के दिन वह अर्श के साए में होगा। जो कोई मुकद्दस रमजान में नमाजें बाजमात अदा करता है यानी हर फर्ज नमाज बाजमात ही पढ़ता है, अल्लाह उस खुशनसीब को हर-हर रकात के बदले में नूर का एक शहर अता फरमाएगा।
रोजे की हालत में उल्टी आने से रोजा नहीं टूटेगा : उलमा किराम
रमजान हेल्पलाइन नंबर 8604887862, 9598348521, 9956971232, 7860799059 पर शुक्रवार को सवाल ओ जवाब का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने नमाज, रोजा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए। उलमा किराम ने कुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया।
1. सवाल : क्या रोजे की हालत में उल्टी आने से रोजा टूट जाता है?
जवाब : नहीं, रोजे की हालत में खुद ब खुद उल्टी आने से रोजा नहीं टूटता, अगर्चे मुंह भर हो या उससे भी ज्यादा।
2. सवाल : खरीदी हुई जमीन पर जकात है या नहीं?
जवाब : अगर रिहाइशी मकान के लिए खरीदा है तो उस पर जकात नहीं। अगर तिजारत (बिजनेस) की नियत से खरीदा है तो उस पर जकात फर्ज है।
