गोरखपुर। सामाजिक,धार्मिक व राष्ट्रवादी विचारधारा युक्त संस्था विद्वत् जनकल्याण समिति ने दिनांक 21 अप्रैल दिन मंगलवार को आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी की जयंती मनाई। संस्था महामंत्री पं. बृजेश पाण्डेय ज्योतिषाचार्य ने राजेन्द्र नगर पश्चिमी संस्था कार्यालय पर शंकराचार्य जी को माल्यार्पण तथा धूप-दीप प्रज्वलित कर जयंती मानते हुए उनके कृतियों को स्मरण किये। पंडित बृजेश पाण्डेय ने बताया की आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य का जन्म बैशाख शुक्लपक्ष पंचमी तिथि को केरल के कलामी मे हुआ था। अद्वैत् वेदांत् के प्रतिपादक शंकराचार्य जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। वे भारत के महान दार्शनिक,संत और अद्वैत वेदांत के प्रचारक थे। वे भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता के सूत्रधार थे,जिन्होंने उस समय के खंडित सनातन धर्म को पुनः जागृत किया। केरल में जन्में शंकराचार्य जी ने मात्र 8 वर्ष की आयु में संन्यास लिए तथा वेदों का अध्ययन किए और 32 वर्ष की अल्पायु में भारत के चारों दिशाओं के द्वारका, पुरी, श्रृंगेरी, बद्रीनाथ में मठ स्थापित कर राष्ट्र को एकता के सूत्र में बाँधने का कार्य किये। दर्शन उनका मुख्य योगदान अद्वैत वेदांत का प्रतिपादन था। उन्होने उपनिषद्,भगवद्गीता और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य लिखे और ज्ञान,भक्ति कर्म के बीच समन्वय स्थापित किए। उनके द्वारा रचित भजगोविंदम, भवानीअष्टकम्,
कनकधारा आदि जैसे स्त्रोत्रों का पाठ किया जाता है। उन्होंने धर्म राज्य की स्थापना कर सभी सनातनियों को एकसूत्र मे पिरोने का कार्य किया। उनकी जीवनी व कृतिया सभी सनातनीयों के लिए प्रेरणास्रोत है।

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