गोर्रा में डूब रही छात्रा के लिए फरिश्ता बना अयूब, अपनी जान जोखिम में डाल बचाई बेटी की जिंदगी; ऐसे बहादुर युवाओं को मिलना चाहिए सम्मान
गोरखपुर। झंगहा थाना क्षेत्र में मंगलवार को जो हुआ, उसने यह साबित कर दिया कि इंसानियत आज भी जिंदा है। एक ओर पढ़ाई छूटने की आशंका से परेशान 17 वर्षीय छात्रा ने गोर्रा नदी में छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश की, तो दूसरी ओर जंगल गौरी निवासी अयूब बिना एक पल गंवाए उफनती नदी में कूद पड़े। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना करीब 15 मिनट तक गहरे पानी में संघर्ष किया और आखिरकार छात्रा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, छात्रा के नदी में कूदते ही आसपास मौजूद लोग घबरा गए। कई लोग मदद के लिए आवाज लगाते रहे, लेकिन अयूब ने किसी के इंतजार के बजाय खुद नदी में छलांग लगा दी। तेज बहाव और गहरे पानी के बीच उन्होंने साहस, सूझबूझ और हिम्मत का परिचय देते हुए छात्रा को सुरक्षित किनारे पहुंचाया। यदि कुछ मिनट और देर हो जाती, तो यह घटना एक दर्दनाक हादसे में बदल सकती थी।
बाद में छात्रा ने पुलिस को बताया कि उसने इस वर्ष आठवीं कक्षा उत्तीर्ण की है और नौवीं में प्रवेश लेना चाहती थी, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसका दाखिला नहीं कराया जा रहा था। इसी मानसिक तनाव में उसने यह कदम उठा लिया।
घटना के बाद झंगहा पुलिस ने छात्रा और उसके परिजनों की काउंसलिंग कराई। मिशन शक्ति टीम की मौजूदगी में पुलिस ने छात्रा की पढ़ाई, ड्रेस और किताबों की व्यवस्था कराने का भरोसा दिया। पुलिस के इस मानवीय कदम ने छात्रा और उसके परिवार को नई उम्मीद दी।
लेकिन इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा नायक अयूब हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि बहादुरी किसी पद, पहचान या संसाधन की मोहताज नहीं होती। उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर एक अनजान बेटी को नया जीवन दिया। ऐसे साहसिक कार्य समाज के लिए प्रेरणा हैं।
अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार अयूब जैसे बहादुर युवक को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करे। यदि ऐसे लोगों को पुरस्कार, प्रशस्ति पत्र और उचित सम्मान मिलेगा, तो समाज में दूसरों की जान बचाने के लिए आगे आने का हौसला और बढ़ेगा। अक्सर लोग अपनी सुरक्षा के डर से मदद करने से पीछे हट जाते हैं, लेकिन अयूब ने दिखा दिया कि समय पर उठाया गया एक साहसी कदम किसी परिवार की दुनिया उजड़ने से बचा सकता है।
अयूब का यह साहस केवल एक छात्रा की जान बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है। ऐसे युवाओं को सम्मानित करना केवल उनका सम्मान नहीं होगा, बल्कि समाज में सेवा, साहस और इंसानियत की भावना को भी मजबूत करेगा।
