गोरखपुर। जनपद गोरखपुर के खजनी तहसील अंतर्गत ग्राम हरिहरपुर निवासी डॉ. पंकज सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से सहायक प्राध्यापक (इतिहास) के पद पर चयनित होकर जिले का गौरव बढ़ाया है। अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने उन्हें महात्मा गांधी राजकीय महाविद्यालय, मायाबंदर में ग्रुप-A राजपत्रित पद पर प्रथम नियुक्ति प्रदान की है। प्रशासन द्वारा 30 सितंबर 2026 को जारी नियुक्ति आदेश उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की आधिकारिक पुष्टि करता है। उनकी सफलता से परिवार, शुभचिंतकों और क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। डॉ. पंकज सिंह की यह उपलब्धि केवल एक सरकारी पद पर चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि उच्च शिक्षा, ऐतिहासिक अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों के क्षेत्र में उनके निरंतर योगदान की भी परिचायक है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से इतिहास में स्नातक की पढ़ाई शुरू करने से लेकर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी प्राप्त करने, राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थान NIEPA में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य करने और अब संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से नियुक्ति प्राप्त करने तक का उनका सफर उल्लेखनीय रहा है। डॉ सिंह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (UGC-NET) उत्तीर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, उन्हें प्रतिष्ठित भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR), भारत सरकार की ओर से वर्ष 2021–2023 के दौरान डॉक्टोरल फेलोशिप भी प्राप्त हुई। इन उपलब्धियों ने इतिहास के क्षेत्र में उनके अकादमिक और शोधपरक करियर को मजबूत आधार प्रदान किया। भगत सिंह के मुकदमे पर शोध, क्रांतिकारी आंदोलन पर विशेष अध्ययन डॉ. सिंह के शोध का विषय “भगत सिंह का मुकदमा, उनके गवाह एवं गवाहों की भूमिका” रहा है। इस विषय के माध्यम से उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन, क्रांतिकारी गतिविधियों और औपनिवेशिक न्यायिक व्यवस्था के ऐतिहासिक पक्षों का अध्ययन किया।आधुनिक भारतीय इतिहास और क्रांतिकारी आंदोलन में उनकी विशेष रुचि उनके प्रकाशित शोधपत्रों में भी दिखाई देती है। उनके प्रमुख शोधपत्रों में “भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के द्वितीय चरण में क्रांतिकारी आंदोलन (1925–1931): हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के संदर्भ में”, “भगत सिंह के प्रारंभिक क्रांतिकारी आंदोलन का अवलोकन” तथा “औपनिवेशिक शिक्षा नीति: एक नकारात्मक मोड़ बिंदु” शामिल हैं। इसके अलावा, भारत-नेपाल शांति वार्ता एवं मैत्री संधि (1950–1971) और माधव राव सदाशिव राव गोलवलकर के आर्थिक चिंतन जैसे विषयों पर भी उनके शोधपत्र प्रकाशित हुए हैं। वर्ष 2025 में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर पर प्रकाशित संपादित पुस्तक में उनका एक अध्याय भी शामिल है, इसके अलावा उनके शोधपत्र कई राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं । यह उनके अध्ययन के व्यापक दायरे को दर्शाता है।

NIEPA में सहायक प्राध्यापक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान
UPSC के माध्यम से चयन से पहले डॉ. पंकज सिंह राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (NIEPA), नई दिल्ली के राष्ट्रीय विद्यालय नेतृत्व केंद्र (NCSL) में 24 जून 2025 से सहायक प्राध्यापक के रूप में कार्यरत रहे हैं। यहाँ उनका कार्य विद्यालय नेतृत्व विकास, शैक्षिक क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, अध्ययन सामग्री विकास और शैक्षिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों से जुड़ा रहा है।
NIEPA में कार्य के दौरान उन्होंने विद्यालय नेतृत्व विकास से संबंधित राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भागीदारी की। इनमें भारतीय ज्ञान परंपरा को विद्यालय नेतृत्व विकास से जोड़ने संबंधी कार्यशाला, विद्यालय नेतृत्व मानकों के विकास पर परामर्श बैठक तथा विद्यालय नेतृत्व विकास की क्षेत्रीय समीक्षा एवं नियोजन कार्यशालाएँ उल्लेखनीय हैं।
उनकी शैक्षणिक गतिविधियाँ केवल संस्थागत कार्यों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने NCERT के PM e-Vidya चैनल पर विशेषज्ञ के रूप में लाइव कार्यक्रमों में भी भाग लिया। इन कार्यक्रमों में कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सरकारी प्राथमिक विद्यालय का नेतृत्व, उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा के विकास में विद्यालय नेतृत्व की भूमिका, विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों के संदर्भ में विद्यालय नेतृत्व की संभावनाएँ तथा विद्यालयों में सामुदायिक भागीदारी जैसे विषय शामिल रहे।
डॉ. पंकज सिंह के पिता श्री जगदीश सिंह विद्युत विभाग से सेवानिवृत्त हैं, जबकि उनकी माता श्रीमती आरती सिंह गृहणी हैं। हरिहरपुर गाँव से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित चयन प्रक्रिया के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह उपलब्धि हासिल करना उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है।
उनकी शैक्षणिक यात्रा में निरंतर अध्ययन, शोध के प्रति प्रतिबद्धता और विभिन्न संस्थानों में प्राप्त अनुभव की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो इतिहास, उच्च शिक्षा, शोध और अध्यापन के क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते हैं।
डॉ. पंकज सिंह की इस उपलब्धि पर परिवारजनों, मित्रों, शुभचिंतकों और क्षेत्रवासियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
