

खानकाह हज़रत मियाँ मोहम्मद नियाज़ बहादुर शाह उर्फ़ मिस्कीन शाह के गद्दीनशीन फिरोज अहमद मिस्कीनी निहाली चिश्ती निज़ामी और सदर-ए-आला अशफ़ाक हुसैन मेकरानी ने 87वें उर्स की तैयारियों की दी जानकारी 28 से 30 अक्टूबर तक मनेगा तीन दिवसीय उर्स-ए-पाक,संदल-गुस्ल से होगा आगाज़; गागर-चादर जुलूस और सूफियाना कव्वाली में दिखेगी गंगा-जमुनी तहज़ीब की झलक
गोरखपुर। अंधियारीबाग स्थित खानकाह हज़रत मियाँ मोहम्मद नियाज़ बहादुर शाह उर्फ़ मिस्कीन शाह (रहमतुल्लाह अलैह) ट्रस्ट (रजि. नं. 123/23) के तत्वावधान में 87वाँ सालाना उर्स-ए-पाक 28 से 30 अक्टूबर 2026 तक अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जाएगा। उर्स की तैयारियों को लेकर खानकाह परिसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें गद्दीनशीन एवं मुख्य ट्रस्टी हज़रत फिरोज अहमद मिस्कीनी निहाली चिश्ती निज़ामी और सदर-ए-आला एवं अध्यक्ष अशफ़ाक हुसैन मेकरानी ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी।
गद्दीनशीन फिरोज अहमद निहाली ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी उर्स-ए-पाक पारंपरिक सूफियाना अंदाज में आयोजित किया जाएगा। तीन दिवसीय आयोजन में संदल पोशी, गुस्ल शरीफ, कुरान ख्वानी, जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी, गागर-चादर जुलूस, महफिल-ए-समा, लंगर-ए-आम और कुल शरीफ सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम होंगे। उर्स में देश के विभिन्न हिस्सों से अकीदतमंदों के पहुंचने की उम्मीद है।
सदर-ए-आला एवं अध्यक्ष अशफ़ाक हुसैन मेकरानी ने कहा कि अध्यक्ष पद पर उनके पहले कार्यकाल का यह उर्स है। गद्दीनशीन, सरपरस्तों और कमेटी के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों के सहयोग से उर्स को यादगार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खानकाह की परंपरा आपसी मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देती है। उर्स में सभी धर्मों और समाजों के लोगों की भागीदारी से गंगा-जमुनी तहज़ीब की खूबसूरत झलक देखने को मिलेगी।
तीन दिवसीय उर्स का कार्यक्रम
28 अक्टूबर, बुधवार: बाद नमाज़ असर गुस्ल शरीफ और संदल पोशी होगी। बाद नमाज़ मगरिब हल्का-ए-जिक्र तथा बाद नमाज़ ईशा जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) का आयोजन किया जाएगा।
29 अक्टूबर, जुमेरात: बाद नमाज़ फज्र कुरान ख्वानी और सुबह 9 बजे महफिल-ए-मिलाद शरीफ होगी। बाद नमाज़ जोहर रहमत नगर स्थित गद्दीनशीन के आवास से सरकारी चादर और गागर का जुलूस निकलेगा। जुलूस में विभिन्न धर्मों के लोग अमन, मोहब्बत और भाईचारे का संदेश देते हुए शामिल होंगे। जुलूस खानकाह मिस्कीनिया पहुंचकर बारगाह में पेश किया जाएगा। बाद नमाज़ ईशा महफिल-ए-समा में मशहूर कव्वाल आदिल वारसी कलकत्तावी सूफियाना कलाम पेश करेंगे।
30 अक्टूबर, जुमा: सुबह 9 बजे हज़रत सूफी सैयद निहाल अहमद शाह कलकत्तावी की मुबारक खानकाह से लाई गई रिवायती चादर बारगाह हज़रत मिस्कीन शाह (रहमतुल्लाह अलैह) में पेश की जाएगी। इसके बाद महफिल-ए-समा और सूफियाना कव्वाली का आयोजन होगा। दोपहर 12:30 बजे लंगर-ए-आम तकसीम किया जाएगा। बाद नमाज़ असर कुल शरीफ के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में खानकाह के सरपरस्त अली सफदर शाह, महबूब सईद हारिश, हसन जमाल उर्फ़ बबुआ भाई, तौकीर अहमद सिद्दीकी, उपाध्यक्ष ई. मिन्नत गोरखपुरी, सचिव मोहम्मद शहाबुद्दीन सहित कमेटी के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।
खानकाह कमेटी ने सभी अकीदतमंदों और आम लोगों से उर्स में शिरकत करने की अपील की है। आयोजन का मुख्य संदेश है— “इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।”

