दस साल के फरज़ान ने रखा पहला रोज़ा, हुआ सामूहिक रोज़ा इफ़्तार

गोरखपुर। रमज़ान में बड़ों के साथ बच्चे भी खूब इबादत कर रहे हैं। रोज़ा रखने में बच्चे भी पीछे नहीं है। मोहल्ला अस्करगंज रेती का पुल निवासी इरफ़ान सिद्दीक़ी व इरम इस्लाम के दस वर्षीय पुत्र मोहम्मद फरज़ान ने रविवार को अपनी ज़िंदगी का पहला रोज़ा रखा। मेट्रो पोलिटन स्कूल के क्लास चार में पढ़ने वाले फरज़ान के लिए सहरी का ख़ास एहतमाम किया गया। भूख व प्यास की शिद्दत को बर्दाश्त करते हुए फरज़ान ने दिन भर अल्लाह की इबादत और नमाज़ में अपना वक्त गुजारा। घर पर ही दीनी तालीम व तरबियत हासिल कर रहे फरजान ने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों आदि के साथ शाम में अल्लाह का शुक्र अदा करते हुए रोज़ा खोला। उन्हें फुफी व अन्य लोगों ने ढे़र सारे तोहफे और दुआएं दीं। फरज़ान के वालिद वालिदा ने हौसला बढ़ाते हुए खुशी का इज़हार किया। इस मौके पर अलसुबह कुरआन ख्वानी के बाद सलातो सलाम और दुआ हुई। शाम को सामूहिक रोज़ा इफ्तार हुआ और सभी ने मिलकर मगरिब की नमाज़ अदा की।
रोज़ा इफ्तार में मो. शाहवेज़, शहर मुफ्ती अख़्तर हुसैन मन्नानी, नायब शहर काज़ी मुफ्ती मो. अज़हर शम्सी, कारी मो. अनस क़ादरी, सैयद फरहान क़ादरी, मौलाना दानिश रज़ा, हाफिज सैफ अली, हाफिज़ अशरफ रज़ा, तनवीर आज़ाद, अहमद फ्रेज़र, सुभाष गुप्ता, हाजी अनीस अहमद खाँ, नजमुलहक़ खाँ, अतीक अहमद, मो. सैफ, वक़ार अहमद, दानिश अंसारी, हाजी एजाज़ अख़्तर, शाज़ैन नवाब, सुल्तान नवाब, मो. इरफानुल्लाह, नूर अहमद, अनीस अहमद आदि ने शिरकत की।
अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए रखा रोज़ा
गोरखपुर। रोजेदारों ने अल्लाह के हुक्म का पालन करते हुए रोज़ा, नमाज़ व अन्य इबादत की। शाम को सभी ने मिलकर रोज़ा इफ्तार कर पूरी दुनिया में अमनो अमान की दुआ मांगी। सभी मस्जिदें नमाज़ियों से भरी रहीं। मस्जिदों में चल रहे दर्स के कार्यक्रम में भी लोगों ने शिरकत की। रविवार को 13वां रोज़ा पूरा हो गया। करीब 13 घंटा 37 मिनट का लम्बा रोज़ा मुसलमानों के सब्र व शुक्र का इम्तिहान ले रहा है। तरावीह की नमाज़ का सिलसिला जारी है। मुस्लिम बाहुल्य मोहल्लों में चहल पहल रह रही है। रेती, घंटाघर, शाह मारूफ, गीता प्रेस, गोलघर आदि के बाजार में ईद की खरीदारी शुरू हो चुकी है। महिलाएं इबादत के साथ बाहर की जिम्मेदारी बाखूबी निभा रही हैं। दर्जियों की दुकानों पर लोग पहुंच रहे हैं। सेवई, खजूर, मिस्वाक, टोपी, तस्बीह, इत्र की मांग बढ़ गई है।
इबादत और लोगों के साथ हमदर्दी का महीना है रमज़ान : कारी फिरोज
दरोगा मस्जिद अफगानहाता के नायब इमाम कारी फिरोज आलम कादरी ने कहा कि इसी मुबारक महीने की एक रात में क़यामत तक आने वाले तमाम इंसानों की रहनुमाई के लिए अल्लाह की किताब क़ुरआन आसमान से दुनिया पर उतारी गई। जिससे फायदा हासिल करने की बुनियादी शर्त परहेजगारी है। अल्लाह का इरशाद है ‘‘यह किताब ऐसी है कि इसमें कोई शक नहीं, हिदायत है परहेज़गारों के लिए मतलब अल्लाह से डरने वालों के लिए”। दूसरी तरफ अल्लाह ने क़ुरआन में रोज़ों को फ़र्ज़ किए जाने का मक़सद बताते हुए फरमाया ‘‘यानी तुम पर रोज़े फर्ज़ किए गए ताकि तुम परहेज़गार बन जाओ” इस मुबारक महीने में एक ऐसी रात है जिसे शबे कद्र कहते हैं जिसमें इबादत करना हज़ार महीनों की इबादत से अफज़ल है। यह महीना अल्लाह की इबादत, इताअत और लोगों के साथ हमदर्दी व गमगुसारी और क़ुरआन का महीना है।
खूब इबादत कर अल्लाह को राजी करें : कारी शराफत
बेलाल मस्जिद इमामबाड़ा अलहदादपुर के इमाम कारी शराफत हुसैन क़ादरी ने बताया कि रोज़ा अल्लाह का अदब भी है और फ़जल की तलब भी है। अल्लाह महान है इसलिए उस अज़ीम से डरना दरअसल मोहब्बत करना ही है, इसलिए एक रोजेदार जब रोज़ा रखता है तो उसके दिल में ख़ौफ़े-खुदा होता है, जो उसे रोज़े के अहकाम और अदब से बांधता है। बाकी बचे रोज़े में खूब इबादत कर अल्लाह को राजी करें। सदका, जकात व फित्रा की रकम हकदारों तक जल्द पहुंचा दें ताकि वह रमज़ान व ईद की खुशियों में शामिल हो सकें। अल्लाह ने हर अमल का दुनिया में ही बदला बता दिया कि किस अमल पर क्या मिलेगा मगर रोज़ा के बारे में इरशाद फरमाया कि मैं खुद ही इसका बदला दूंगा या फरमाया कि मैं खुद ही रोज़ा का बदला (जज़ा) हूं।
क़र्ज़ दी गई रकम पर ज़कात फ़र्ज़ है : उलमा किराम
उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमज़ान हेल्पलाइन नंबरों पर रविवार को सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने नमाज़, रोज़ा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए। उलमा किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया।
- सवाल : क्या क़र्ज़ दी गई रकम पर ज़कात है? (ताबिश, गाजी रौजा)
जवाब : जी, ज़कात फ़र्ज़ है। (मुफ्ती अजहर) - सवाल : क्या नमाज़े तरावीह में देखकर क़ुरआन पढ़ सकते हैं? (सैयद ओसामा, घोसीपुर)
जवाब : नहीं इस तरह पढ़ने से नमाज़ नहीं होगी। (मौलाना मोहम्मद अहमद) - सवाल : रोज़े की हालत में आंसू अगर मुंह में चला जाए तो? (मकसूद, इस्लाम चक)
जवाब: अगर आंसू की बूंद सिर्फ मुंह में गई थी कि थूक दिया तो रोज़ा नहीं टूटेगा और अगर हलक में उतर गई तो टूट जाएगा। (मुफ्ती मेराज)
