आठ वर्षीय अंतर्राष्ट्रीय बाल साध्वी श्वेतिमा माधव प्रिया पहुंची मुंजेश्वरनाथ धाम

लिया बाबा मुंजेश्वरनाथ का आशीष
साध्वी श्वेतिमा ख्यातिलब्ध समाजसेवी सौहार्द शिरोमणि संत सौरभ एवं देहदानी डा रागिनी पाण्डेय की सुपुत्री है

गोरखपुर

कहते हैं बाल मन सपनों में तरह तरह के खिलौने देखा करते हैं लेकिन साध्वी श्वेतिमा को सपने में ठाकुर जी दिखा करते थे, इनकी लीलाएं दिखा करती थी। सुबह होते ही सपनों का वर्णन अपने माता पिता से करती थी। वे बताती थी कि कैसे वृन्दावन बिहारी लाल उनसे सपनों में बातें करते हैं। भगवान के लीलाओं को जानने के लिए बालपन मेरी ही साध्वी श्वेतिमा ने भागवत पुराण के बारे में विस्तृत रूप से जानने को इच्छुक हुई। उनके इस जिज्ञासा को उनके पिता ने जाना और नियमित रूप से उन्होंने साध्वी श्वेतिमा को वेदों के बारे में गहन जानकारी देनी शुरू की।परिणाम स्वरूप पांच वर्ष की आयु से ही अपने माता पिता को धार्मिक कथाएं सुनाना प्रारंभ कर दी।

बचपन से ही भगवान के प्रति लगाव, भजन के प्रति उत्सुकता और गांव के रामलीला साथ ही माता पिता से मिली प्रेरणा। इसके बाद धीरे धीरे भागवत पुराण को पढ़ना शुरू किया। बांके बिहारी लाल के जीवन चरित्र ने उन्हें प्रभावित किया। एक रात साध्वी को सपने में वृन्दावन बिहारी लाल ने कहा कि मेरी गाथा को तुम सभी लोगों को सुनाओ। दूसरे दिन साध्वी श्वेतिमा ने भागवत पुराण के प्रथम श्लोक को कंठस्थ किया। आज आठ वर्ष की साध्वी के अंदर कई प्रकार  की चमत्कारिक शक्ति है, वे जीवन के कठिनाइयों के प्रति लोगों को सजग करती हैं और इसका प्रतिफल भी लोगों को मिला है।
सात वर्ष की आयु से ही श्रीमद भागवत कथा का रसपान कराने वाली बाल व्यास साध्वी श्वेतिमा माधव प्रिया गढ़वा झारखंड से कथा कर अपने गृह वापसी के पश्चात बाबा मुंजेश्वर नाथ धाम  भौवापार में पहुंचकर बाबा  मुंजेश्वर नाथ का दर्शन कर आशीष प्राप्त किया।
विदित हो अंतर्राष्ट्रीय श्रीमद भागवत कथावाचिका  बाल व्यास साध्वी श्वेतिमा माधव प्रिया सनातन धर्म का ध्वज वाहक बनकर सनातन संस्कृति का पूरे विश्व के परचम फैलाना चाहती है।साध्वी के गुरु आचार्य शिवम शुक्ला शिष्य अंतर्राष्ट्रीय कथा प्रवक्ता डा.श्याम सुंदर परासर ,संगीत गुरु अवनिंद्र सिंह एवं सुनिशा श्रीवास्तव है।
साध्वी श्वेतिमा माधव प्रिया का चार वर्षीय अनुज  बाल भक्त सौराष्ट्र भी श्रीमद भगवत गीता का का अध्ययन कर रहा है।
साध्वी श्वेतिमा माधव प्रिया पांच वर्ष की आयु से ही अपने माता पिता सहित गृह पर सभी आने जाने वाले को धार्मिक दंतकथाएं सुनाना प्रारंभ कर दी थी। मालूम हो कि साध्वी श्वेतिमा माधव प्रिया के पिता  मानद कुलपति सौहार्द शिरोमणि  डा.सौरभ पाण्डेय, धराधाम अंतराष्ट्रीय केंद्र के प्रमुख हैं, जिनकी जीवनी उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सर्वेश कांत वर्मा द्वारा लिखित नूतन हिंदी नगीन प्रकाशन हिंदी विषय के कक्षा  दस,ग्यारह एवं बारह के पाठ्य पुस्तक में पढ़ाई जाती है। साथ ही माता जी डा .रागिनी पाण्डेय विगत वर्ष की मिसेज इंडिया प्रतियोगिता की विजेता रह चुकी हैं। आधुनिकता और धर्म का यह संयोग अपने आप में चमत्कार है।

By Minhajalisiddiquiali

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