एक और महिला ने कर्ज से तंग आकर जान गंवाई
विगत 25 जनवरी को गोरखपुर महानगर से बिल्कुल सटे दक्षिण एक तरह से महानगर का हिस्सा ही ग्राम अजवैनिया में 25 वर्षीय ज्योति निषाद पत्नी श्री आकाश निषाद की रात्रि में 11:00 बजे मृत्यु हो गई। उसकी जेठानी संजू उसको लेकर सदर अस्पताल गई जहां डॉक्टर ने बताया कि यह मर चुकी है ,तब उसको विश्वास हुआ की ज्योति मर चुकी है। 25 वर्षीय ज्योति सौरभ 5 वर्ष, सान्हवी डेढ़ वर्ष के दो बच्चों की मां थी। उसके पति आकाश स्वयं बेंगलुरु में रहकर पेंट पॉलिश का काम करते हैं। आकाश, मोती ,झीनक, व जय चार भाई हैं ।कोई खेती-बड़ी व रोजगार व्यवसाय नहीं है। सिर्फ मजदूरी पर आश्रित हैं। ज्योति ने उत्कर्ष माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 75000 बंधन बैंक से 30,000 व एक लाख,तथा सोनाटा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से 53,310 रुपए कर्ज ली थी। मरने के 1 दिन पहले उत्कर्ष कंपनी का पैसा चुकता कर दी थी। लेकिन बंधन बैंक व सोनाटा प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का 13,10 तथा 1510 रुपए हर 15 में दिन किस्त देनी पड़ती है ।जिसका 53 किस्त में से 31 किस्त दे चुकी है ।उसके पति आकाश₹600 दिहाड़ी पर बेंगलुरु में मजदूरी करते है। ज्योति के घर जाने पर उसकी जेठानी संजू पत्नी मोती व कुंती पत्नी झीनक वह अन्य महिलाओं ने बताया कि हम लोगों के पास जमीन जायदाद व्यवसाय और रोजगार न होने के कारण पतियों को बाहर मजदूरी करने और पत्नियों को शहर में चौका बर्तन करने जाना पड़ता है।बीमारी हमारी वह अन्य जरूरत के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से कर्ज लेनी पड़ती है। ज्योति संजू व कुंती तीनों ने आवास बनाने के लिए उत्कर्ष, सोनाटा व बंधन बैंक से कर्ज ले रखी है। जिसकी किस्त 1510 व 1310 रुपए हर 15 में दिन देनी पड़ती है। ज्योति की मृत्यु के बाद फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी उनके घर आए थे बोलकर गए हैं कि ज्योति की मृत्यु हो गई है तो उसका कर्ज तो माफ हो जाएगा लेकिन अन्य सबको तो कर्ज देना ही होगा। वहीं बंधन बैंक कर्मी अभी मृतिका के पति से तीस हजार व एक लाख रुपए वसूली की बात कर रहे हैं।
माइक्रोफाइनेंस कंपनियों के डर से महिलाएं व परिजन किसी से अपनी बात भी नहीं बताते हैं। सही जानकारी लेने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ज्योति की मृत्यु क्यों हुई इस पर भी परिजन खुलकर बताने से बच रहे हैं ।
महानगर से सटे इस निषाद बहुल मोहल्ले में इन चार भाइयों के पास आज भी आकाश व मोती का टिनशेड व दो भाइयों की छत दिखी, लेकिन इनके सहित आसपास कोई भी प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री आवास नहीं दिखी।
ज्योति की मृत्यु के बाद पति के न रहने पर किसी ने पोस्टमार्टम नहीं कराया। जिससे उसकी बीमा का भी लाभ परिजनों को नहीं मिल पाएगा।
ज्ञातव्य है कि माइक्रो फाइनेंस कंपनियां गरीब महिलाओं को कर्ज देते समय उनके ही कर्ज के पैसे से बीमा करती हैं, लेकिन मृत्यु के बाद बीमा की राशि मृतक परिजनों के बजाय स्वयं क्लेम करके ले लेती हैं। और आरबीआई गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए लोगों को मृत्यु के लिए, पलायन के लिए मजबूर कर रही हैं ।और इनको शासन प्रशासन का खुला संरक्षण प्राप्त है ।
भाकपा माले द्वारा आरबीआई गाइडलाइन का अनुपालन के लिए जिला प्रशासन को लिखित ज्ञापन मांग पत्र देने के बाद भी कोई संज्ञान तक नहीं लिया जा रहा है। इससे गरीब महिलाओं की आत्महत्या व परिवार सहित पलायन की घटनाएं चौतरफा बढ़ती जा रही हैं।
ज्योति की मृत्यु की सूचना पर भाकपा माले राज्य स्थाई समिति सदस्य राजेश साहनी के नेतृत्व में महानगर कमेटी सदस्य दीनदयाल यादव, सुग्रीव निषाद, नंदू प्रसाद व विशाती निषाद की टीम ज्योति के घर पहुंच कर उपरोक्त जानकारी ली, तथा जिला प्रशासन से तत्काल राहत सहायता देने,व कर्ज वसूली में आरबीआई गाइडलाइन का अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की है। और जल्द ही इस सवाल के साथ-साथ बिजली बिल माफी, सहारा फाइनेंस कंपनियों से गरीबों की पैसा वापसी के लिए कार्यक्रम लेने की बात कही है।

By Minhajalisiddiquiali

गोरखपुर up53 सीएम सिटी

Leave a Reply

Discover more from Arushan News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading