*सीएचओ ने सीखा ‘मॉनीटरिंग’ और ‘सपोर्ट’ का मंत्र, मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने में बनेंगे मददगार*
ई आरोग्य पाठशाला में एम्स गोरखपुर की विशेषज्ञ डॉ शिखा सेठ ने एएनसी के बारे में दी जानकारी
केस के जरिये सीएचओ ने संवाद भी किया
*गोरखपुर।* जिले के साढ़े तीन सौ से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) ने प्रसव पूर्व देखभाल (एएनसी) के बारे में ‘मॉनीटरिंग’ और ‘सपोर्ट’ का मंत्र सीखा। मंगलवार को दोपहर बाद चली इस वर्चुअल पाठशाला में एम्स गोरखपुर से विषय विशेषज्ञ डॉ शिखा सेठ ने उन्हें बताया कि इन दोनों मंत्रों के जरिये मातृ शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा भी अपने कार्यालय से पाठशाला का हिस्सा बने और उनकी मौजूदगी में सीएचओ ने दो अलग अलग केस के जरिये विषय विशेषज्ञ से संवाद किया। इस दौरान इको इंडिया की प्रतिनिधि डॉ सत्या व दीक्षा ने तकनीकी सहयोग दिया।
*एम्स गोरखपुर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष डॉ शिखा सेठ ने* सीएचओ को बताया कि गर्भावस्था के नौ महीने की सतत निगरानी और गर्भवती को चिकित्सा इकाई एवं घर में सही देखभाल मिलने से सुरक्षित प्रसव की राह आसान हो जाती है। जहां सामान्य गर्भवती की गर्भावस्था में कम से कम चार बार प्रसव पूर्व जांच होनी चाहिए, वहीं उच्च जोखिम गर्भावस्था (एचआरपी) महिला की चिकित्सक के परामर्श के अनुसार उनकी देखरेख में आठ से बारह बार प्रसव पूर्व जांच व निगरानी होनी चाहिए। गर्भावस्था के प्रथम तिमाही में एचआरपी की पहचान हो जानी चाहिए और उसे सही चिकित्सा इकाई पर संदर्भित कर दिया जाना चाहिए। पहली तिमाही में बच्चे के अंग बनना शुरू होते हैं, इसलिए बिना चिकित्सक के किसी भी प्रकार के दवा का सेवन करने से गर्भवती को मना करना है।
डॉ सेठ ने बताया कि दूसरे त्रैमास में भ्रूण का विकास होता है और उस समय गर्भवती को अतिरिक्त कैलोरिज की आवश्यकता होती है। ऐसे में उसे प्रोटीनयुक्त सही खानपान की सलाह दें। साथ ही साथ आयरन फोलिक और कैल्शियम की दवाओं के सेवन का भी परामर्श दें। उन्हें बताएं कि सिर्फ खानपान से इन तत्वों की पूर्ति नहीं होती है, इसलिए आयरन फोलिक व कैल्शियम का अलग से सेवन आवश्यक है। दूसरी तिमाही में गर्भवती को पेट से कीड़े निकालने की दवा खाना और टिटनेस डिप्थीरिया का टीका लगवाना भी आवश्यक है। दूसरे त्रैमास में मधुमेह की भी जांच होनी चाहिए। अगर यह एक सौ चालीस से अधिक है तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। पूरे गर्भावस्था के दौरान गर्भवती का ग्यारह से बारह किलोग्राम वजन बढ़ना चाहिए। हीमोग्लोबिन की मात्रा दस से कम नहीं होनी चाहिए। अगर खतरे का कोई भी संकेत गर्भ के किसी भी अवस्था में दिखे तो तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र को संदर्भन किया जाना चाहिए।
इस दौरान सीएचओ सीमा वर्मा और अंजू ने दो अलग अलग केस स्टडी के जरिये प्रश्न पूछे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने धन्यवाद देते हुए कहा कि आगामी ई आरोग्य पाठशाला से जिले के चिकित्सा अधिकारियों को भी जोड़ा जाएगा। *उन्होंने बताया कि ई आरोग्य पाठशाला का आयोजन प्रत्येक मंगलवार को दोपहर दो बजे से तीन बजे के बीच किया जा रहा है। अगले मंगलवार को इसमें स्तन कैंसर पर क्षमता संवर्धन किया जाएगा। उक्त सत्र में एम्स के भूतपूर्व वरिष्ठ सर्जन और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के प्रधानाचार्य डॉ अनुराग श्रीवास्तव की प्रस्तुति होगी।* उन्होंने बताया कि इस आयोजन में इको इंडिया का विशेष सहयोग है। एसीएमओ डॉ एके चौधरी, डीटीओ डॉ गणेश यादव और मंडलीय कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर राजीव रंजन भी पाठशाला का हिस्सा बने।


