हजरत सैयद कयामुद्दीन शाह का मनाया गया उर्स-ए-पाक
गोरखपुर। जाफ़रा बाज़ार में सब्जपोश खानदान करीब तीन सौ सालों से आबाद है। इस खानदान और शहर के बड़े वलियों में शुमार हज़रत मीर सैयद कयामुद्दीन शाह अलैहिर्रहमा का 319वां उर्स-ए-पाक रविवार को सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में अकीदत के साथ मनाया गया।सुबह कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी व दुआ ख्वानी की गई। मजार पर चादर पेश करने के बाद कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। उर्स के मौके पर मस्जिद के इमाम व खतीब हाफिज रहमत अली निजामी ने हजरत मीर सैयद कयामुद्दीन शाह की ज़िंदगी व तालीमात पर रोशनी डालते हुए बताया कि वे मुगल शहंशाह शाहजहां के जमाने में गोरखपुर में तशरीफ लाए। जहां वह ठहरे (जाफरा बाजार में) वहां जंगल था। उन्होंने मस्जिद बनवाई। हुजरा कायम किया। हमेशा रोजा रखने और इबादत के अलावा वे बहुत बड़े आरिफ, दीनदार, परहेजगार, सखी थे। उनका मजार सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार के प्रांगण में है। अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व अमान व तरक्की की दुआ मांगी गई। शीरीनी बांटी गई। उर्स में सैयद दानिश अली सब्जपोश, सैयद तारिक अली सब्जपोश, सैयद अहमद सब्जपोश, सैयद अली सब्जपोश, मुहम्मद मुख्तार आलम, मुहम्मद आसिफ, , कारी मुहम्मद अनस रजवी, नेहाल अहमद, आसिफ अहमद, मुनाजिर हसन, हाजी बदरुल हसन, मुहम्मद समर, युसूफ, मुजफ्फर हुसैन रुमी आदि अकीदतमंद मौजूद रहे।
