पैगंबर-ए-इस्लाम और सहाबा मुसलमानों के लिए सर्वोच्च आदर्श : मुफ्ती खालिद अय्यूब

ओपन बुक कॉम्पिटिशन की विजेता बनीं सादिया खातून

गोरखपुर। तहरीक उलमा-ए-हिंद के चेयरमैन व राजस्थान के प्रसिद्ध धर्मगुरु मुफ्ती मुहम्मद खालिद अय्यूब मिस्बाही ने सोमवार को शहर के विभिन्न कार्यक्रमों में शिरकत कर छात्र-छात्राओं व अवाम की रहनुमाई की। तुर्कमानपुर स्थित सुन्नी दारुल कजा व दारुल इफ्ता का निरीक्षण कर सराहना की।

मुफ्ती खालिद ने अलहदादपुर स्थित मदरसा कादरिया तजवीदुल कुरआन लिल बनात में छात्राओं को कामयाबी हासिल करने व बेहतरीन शहरी बनने का तरीका बताया। उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सहाबा किराम (पैगंबर-ए-इस्लाम के साथी) मुसलमानों के लिए सर्वोच्च आदर्श हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम व सहाबा किराम जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, चाहे वह धार्मिक हो, नैतिक हो, सामाजिक हो या राजनीतिक। उनके जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। पैगंबर-ए-इस्लाम का जीवन स्वयं में पूर्ण आचार संहिता है, और सहाबा किराम ने उन शिक्षाओं को अपने व्यवहार में उतारकर उच्चतम नैतिक मानक स्थापित किए।

मदरसा कादरिया के ओपन बुक कॉम्पिटिशन में पहला स्थान पाने वाली सादिया खातून, दूसरा स्थान हासिल करने वाली सना परवीन और तीसरा स्थान पाने वाली आफरीन खातून, अलीशा जावेद, खुशनूद अशरफी, शहाना खातून, सना सिद्दीकी, तरन्नुम खातून को मुफ्ती खालिद ने इनाम व प्रमाण पत्र प्रदान कर दुआओं से नवाजा।

मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों की रहनुमाई और काउंसलिंग उनके भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए जरूरी है। यह उन्हें अपनी भावनाओं को समझने, समस्याओं से निपटने के कौशल विकसित करने और सकारात्मक विकल्प चुनने में मदद करती है। घर, मदरसा या स्कूल में एक ऐसा सुरक्षित वातावरण बनाएं जहां छात्र बिना किसी डर के अपनी भावनाओं और चिंताओं को साझा कर सकें। छात्रों को अपनी भावनाओं को दबाने के बजाय व्यक्त करने के लिए प्रेरित करें। घर के लिए कुछ नियम बनाएं और नियमित दिनचर्या (जैसे खाने और सोने का समय) बनाए रखने से छात्रों में अनुशासन और सुरक्षा की भावना विकसित होती है। माता-पिता और शिक्षक स्वयं एक अच्छा रोल मॉडल बनकर छात्रों को अच्छी आदतें और व्यवहार सिखा सकते हैं। अच्छा करने पर छात्र की सराहना करें और उसे शाबाशी दें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। सही रहनुमाई और काउंसलिंग छात्रों को स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में मदद करती है।

रहमतनगर स्थित सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद में मुफ्ती खालिद ने कहा कि छात्रों के शैक्षिक, व्यक्तिगत, सामाजिक और शारीरिक विकास के लिए लक्ष्य निर्धारण जरूरी है। यह लक्ष्य निर्धारण उन्हें जीवन में सफल होने और अपनी पूरी क्षमता हासिल करने में मदद करता है। माता-पिता और शिक्षक छात्रों को प्रभावी ढंग से लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें प्राप्त करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में अवाम की रहनुमाई करते हुए मुफ्ती खालिद ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम व सहाबा किराम ने एक ऐसे समाज का निर्माण किया जहां रंग, जाति या स्थिति की परवाह किए बिना सभी लोगों के साथ न्याय और समानता का व्यवहार किया जाता है। सहाबा किराम ने इस्लाम के संदेश को फैलाने के लिए अपने जीवन, धन और आराम का बलिदान दिया। उनकी शिक्षाओं और जीवन शैली का पालन करना दुनिया भर के मुसलमानों के लिए धार्मिक कर्तव्य और सम्मान का विषय है।

कार्यक्रम में नायब काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी, कारी शराफत हुसैन कादरी, हाफिज रहमत अली निजामी, कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी, नेहाल अहमद, सरफराज अहमद, हाजी फैज अहमद, आसिफ महमूद, मुजफ्फर हसनैन रूमी, अली गजनफर शाह, महबूब आलम, शहबाज सिद्दीकी, साहिबा खातून, निशात फातिमा, मुहम्मद राफे, मेहरून निसा, तसलीमा खातून, महजबीन खान सुल्तानी, शाहीन फातिमा सुल्तानी, गौसिया अंजुम सुल्तानी, फरहीन फातिमा कादरी, नौशीन फातिमा कादरी, जमातुन निसा कादरी, शिफा खातून कादरी, खुशी नूर, सना फातिमा, उम्मे ऐमन, शिफा खातून, फिजा खातून, सना, मुबस्सिरा‌ आदि ने महती भूमिका निभाई।

By Minhajalisiddiquiali

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