

जगत धर्म चक्रवर्ती संत डॉ. सौरभ पाण्डेय पर आधारित पाठ ICSE कक्षा 8 की हिंदी पुस्तक में शामिल
मूल्यपरक शिक्षा और सर्वधर्म सद्भाव को मिली राष्ट्रीय मान्यता
गोरखपुर।
ICSE बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित हिंदी पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पहल के अंतर्गत नगीना प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हिंदी पुस्तक ‘नूतन दिव्य ज्ञान’ में जगत धर्म चक्रवर्ती एवं सौहार्द शिरोमणि संत डॉ. सौरभ पाण्डेय के जीवन, विचारों एवं सर्वधर्म सद्भाव से जुड़े सामाजिक कार्यों पर आधारित एक विस्तृत पाठ को सम्मिलित किया गया है। शिक्षा जगत में इस पहल को मूल्यपरक एवं चरित्र निर्माण आधारित शिक्षा की दिशा में एक सशक्त कदम माना जा रहा है।
इस पाठ में संत डॉ. सौरभ पाण्डेय की जीवन-यात्रा, सामाजिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक समरसता तथा मानवता केंद्रित दृष्टिकोण को सरल, प्रेरक और छात्रोपयोगी भाषा में प्रस्तुत किया गया है। शब्दार्थ, बोध प्रश्नों और अभ्यास खंड के माध्यम से विद्यार्थियों में भाषा कौशल के साथ-साथ नैतिकता, सेवा-भाव और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित करने का प्रयास किया गया है।
पाठ में संत डॉ. सौरभ पाण्डेय के साथ उनके पारिवारिक एवं प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें उनके पिता श्री सोमनाथ पाण्डेय, पत्नी डॉ. रागिनी पाण्डेय, पुत्री अंतर्राष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया, पुत्र बाल भक्त सौराष्ट्र, प्रमुख मार्गदर्शक श्री राजीव रंजन तिवारी, डॉ. प्रेम प्रकाश (CEO, धरा धाम इंटरनेशनल), सहयोगी डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव, गुरु डॉ. रत्नेश कुमार पाण्डेय, श्री गोरखलाल श्रीवास्तव, प्रो. दिग्विजय नाथ मौर्य, श्री दीप नारायण पाण्डेय तथा डॉ. एहसान अहमद शामिल हैं।
इस पुस्तक के मुख्य हिंदी लेखक श्री सर्वेश कांत वर्मा हैं, जबकि अध्याय एवं अभ्यास खंड का लेखन श्री अभय राज वर्मा द्वारा किया गया है। शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह अध्याय विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें सामाजिक चेतना, सह-अस्तित्व और सर्वधर्म समभाव जैसे मूलभूत मानवीय मूल्यों से भी जोड़ता है।
शिक्षा जगत का मानना है कि जगत धर्म चक्रवर्ती संत डॉ. सौरभ पाण्डेय जैसे व्यक्तित्वों को पाठ्यपुस्तकों में स्थान देना विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक है। यह पहल भावी पीढ़ी में सेवा, सद्भाव, सामाजिक समरसता और शांति के मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
