पैगंबर-ए-इस्लाम की ताजीम करना  ईमान का बुनियादी हिस्सा : कारी अनस

पैगंबर-ए-इस्लाम अपनी उम्मत के हर काम को देख और सुन सकते हैं : हाफिज रहमत

इस्लामी अकीदे की विशेष कार्यशाला का तीसरा सप्ताह

गोरखपुर। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार, जामिया अल इस्लाह एकेडमी नौरंगाबाद गोरखनाथ व मदरसा रजा-ए-मुस्तफा तुर्कमानपुर में पांच सप्ताह तक चलने वाली इस्लामी अकीदे की विशेष कार्यशाला के तीसरे सप्ताह में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ताजीम, हाजिर व नाजिर और जिस्मे मुबारक के बेसाया होने के बारे में विस्तार से बताया गया। कुरआन-ए-पाक, हदीस ए पाक बयान हुई।

मुख्य वक्ता कारी मुहम्मद अनस नक्शबंदी ने कहा कि कुरआन और हदीस के अनुसार अल्लाह ने मुसलमानों को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ताजीम और तौकीर (इज्जत) करने का हुक्म दिया है। हर मुसलमान के लिए अपनी जान, माल और परिवार से भी बढ़कर पैगंबर-ए-इस्लाम से मुहब्बत करना ईमान की पूर्णता की शर्त है। आपकी गरिमा और सम्मान की रक्षा करना हर मुसलमान का धार्मिक कर्तव्य है।  पैगंबर-ए-इस्लाम का सम्मान और आदर (ताजीम) करना  ईमान का बुनियादी हिस्सा है। आपकी ताजीम का सबसे बड़ा व्यावहारिक रूप आपकी सुन्नत (जीवनशैली और शिक्षाओं) का पालन करना और उनके अख्लाक (चरित्र) को अपने जीवन में उतारना है। हमें आपका जिक्र बहुत ही अदब के साथ करना चाहिए। हमें आपके गुणों को बयान करना चाहिए। जब भी आपका नाम लिया जाए तो अदब के साथ दुरूद ओ सलाम पढ़ें। हमें पैगंबर-ए-इस्लाम से वैसी मोहब्बत करनी चाहिए जैसी सहाबा-ए-किराम (उनके साथियों) ने की। पैगंबर-ए-इस्लाम की ताजीम आपके प्रति निष्ठा, आपकी शिक्षाओं का पालन और आपको अल्लाह द्वारा भेजे गए अंतिम पैगंबर के रूप में स्वीकार करना है, आपकी जीवनशैली समस्त मुसलमानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

अध्यक्षता कर रहे हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी कब्रे मुबारक में रहते हुए अल्लाह के हुक्म से अपनी उम्मत के हर काम को देख और सुन सकते हैं, जैसे कोई अपनी हथेली को देखता है, और अल्लाह की मर्जी से कहीं भी तशरीफ ले जा सकते हैं। अल्लाह ने पैगंबर-ए-इस्लाम को यह विशेष शक्ति प्रदान की है। पैगंबर-ए-इस्लाम अपनी मजार (कब्रे मुबारक) में जिस्म के साथ मौजूद हैं, लेकिन अल्लाह के हुक्म से कहीं भी आ जा सकते हैं। वे पूरी कायनात को ऐसे देख सकते हैं जैसे कोई अपनी हथेली को देखता है, जिससे उन्हें हर घटना का इल्म होता है। वे अपनी उम्मत के लिए दुआ करते हैं और उनकी मदद भी करते हैं। पैगंबर-ए-इस्लाम अपनी कब्रे मुबारक में रहते हुए अल्लाह की अता की हुई शक्ति से हर जगह की गतिविधियों को देख और सुन सकते हैं, और यह उनकी महानता और उम्मत से प्यार को दर्शाता है। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपनी उम्मत के अच्छे-बुरे कार्यों को देखते हैं और उन पर गवाह (शहीद) हैं। अल्लाह ने पैगंबर-ए-इस्लाम को यह विशेष शक्ति दी है कि वे अपनी कब्रे मुबारक में रहकर भी दुनिया के हर हिस्से को देख सकते हैं उनकी मदद करते हैं और सभी के कार्यों को जानते हैं।

उन्होंने कहा कि पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बशर (आदमी) व नूर दोनों हैं। आपका जिस्मे मुबारक नूर (दिव्य प्रकाश) से बना हुआ है और आपका साया (परछाई) जमीन पर नहीं पड़ता। यह पैगंबर-ए-इस्लाम की एक विशिष्ट विशेषता है। यह आपका मोजिजा है जो आपकी अद्वितीय और पवित्र हस्ती को दर्शाता है।

अंत में दुरूद ओ सलाम पढ़कर अवाम की खिदमत करने, आपसी प्रेम, भाईचारे दुआ मांगी गई। कार्यशाला में मुजफ्फर हसनैन रूमी, आसिफ महमूद, ताबिश सिद्दीकी, सैयद नदीम अहमद, अली अफसर, शीराज सिद्दीकी, जावेद, आसिफ, शीरीन आसिफ, शबनम, नूर सबा, शीरीन सिराज, अफसाना, शिफा खातून, फिजा खातून, नौशीन फातिमा, सना फातिमा, असगरी खातून, यासमीन, आयशा, फरहत, नाजिया, तानिया अख्तर, अख्तरून निसा, अलीशा खातून, सादिया नूर, खुशी नूर, मंतशा, रूमी, शीरीन बानो, समीना बानो, शबाना, सिदरा, सानिया, उम्मे ऐमन, शीरीन आसिफ, सना खातून, आरजू अर्जुमंद, गुल अफ्शा, अदीबा, फरहीन, आफरीन सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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By Minhajalisiddiquiali

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