*गोरखपुर के विप्र समाज ने परशुराम जयंती पर निकाली प्रभातफेरी*
*विद्वत जनकल्याण समिति का परशुराम जयंती समारोह सम्मपन्न*
गोरखपुर। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर प्रकट हुए महाबाहू परशुराम जी के जयंती पर विद्वत् जनकल्याण समिति गोरखपुर के विद्वत्जनों ने हाँसूपुर स्थिति भगवान परशुराम जी के मंदिर से प्रभात फेरी निकाला। प्रभात फेरी यात्रा से पूर्व विद्वत्जनों व पुरोहित कर्म करने वाले ब्राह्मणों ने अपने अराध्यादेव परशुराम जी का तिलक चन्दन लगाकर विधि-विधान पूर्वक पूजन अर्चन किये।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संरक्षक सदस्य अश्वनी कुमार मिश्र व उपाध्यक्ष पंडित राजेश कुमार मिश्र ने किया। संचालन व देख-रेख महामंत्री ज्योतिषचार्य पंडित बृजेश पाण्डेय द्वारा किया गया। इस दौरान विद्वत्जनों ने बताया की यह पावन दिन अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। जो सदमार्ग पर चलता है उनके सभी कार्यों का अक्षय फल प्राप्त होता हैं। विद्वत्जनों ने ब्राह्मण समाज द्वारा अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और वैदिक मूल्यों के संरक्षण के लिए एकजुटता का संकल्प भी लिया। संगठन महामंत्री ज्योतिषचार्य पं. बृजेश पाण्डेय ने कहा की परशुराम जयंती अक्षय तृतीया पर ब्राह्मण एकता की बात करना समाज को अपनी गौरवशाली परंपरा,शौर्य और संस्कारों के प्रति जागरूक करने का एक प्रमुख अवसर है। भगवान परशुराम को शस्त्र और शास्त्र का समन्वय माना जाता है और उनकी जयंती पर विप्र बंधु एकजुट होकर सामाजिक सशक्तिकरण का परिचय देंते है। संरक्षक सदस्य पंडित अश्वनी कुमार मिश्र व उपाध्यक्ष पंडित राजेश कुमार मिश्र ने कहा की भारतीय इतिहास,संस्कृति और समाज में ब्राह्मण पूर्वजों का योगदान अत्यधिक विस्तृत और महत्वपूर्ण रहा है। उन्हें पारंपरिक रूप से ज्ञान,अध्यापन,धार्मिक अनुष्ठानों और बौद्धिक नेतृत्व का स्तंभ माना जाता रहा है। ब्राह्मणों ने वेदों, उपनिषदों, पुराणों और अन्य प्राचीन शास्त्रों का मौखिक और लिखित रूप से संरक्षण किया। इसई क्रम मे मंत्री पंडित रमेश पाण्डेय व कोषाध्यक्ष पंडित शेषमणि पाण्डेय कहा की भगवान परशुराम जी पारंपरिक गुरु और शिक्षक रहे हैं ।जिन्होंने शिक्षा परंपरा को जीवित रखा।
ऋग्वेद के अनुसार ब्राह्मण समुदाय को उन सात प्रमुख ऋषियों कश्यप,अत्रि,वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और भारद्वाज का वंशज माना जाता है जिन्होंने भारतीय दर्शन की नींव रखी। भारतीय संस्कृति में धार्मिक अनुष्ठानों,यज्ञों और सामाजिक संस्कारों को संपन्न कराने में ब्राह्मणों ने मुख्य भूमिका निभाई है। जिसे पुरोहित या ‘पंडित के रूप में जाना जाता है।
महामंत्री पंडित बृजेश पाण्डेय ने यह भी कहा की इतिहास में ब्राह्मणों ने शिक्षा के साथ-साथ कूटनीति, प्रशासन, ज्योतिष और वैद्यक आयुर्वेद में भी महारत हासिल की। चाणक्य जैसे विद्वान इसके प्रमुख उदाहरण हैं,जिन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना में मार्गदर्शन किया।भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कई ब्राह्मण नेताओं और क्रांतिकारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें बाल गंगाधर तिलक, चंद्रशेखर आजाद, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और सावरकर जैसे नाम शामिल हैं। प्राचीन समय में आर्यभट्ट, भास्करचार्य और वराहमिहिर जैसे खगोलविदों और गणितज्ञों ने विज्ञान की उन्नति में योगदान दिया।
इस दौरान मुख्य रूप से पं. बृजेश पाण्डेय, पं. राजेश मिश्र, पं. अश्वनी कुमार मिश्र,पं. शेषमणि पाण्डेय, पं. रमेश पाण्डेय,पं. अश्वनी त्रिपाठी,पं. धनंजय द्विवेदी, पं. रामप्रसन्न मिश्र,पंडित दिवाकर दूबे, पं. रामसुचित उपाध्याय,पं. बलिराम पाण्डेय दरोगा, पंडित रजत भट्ट, पं. अनुराग त्रिपाठी, पं.अमरनाथ मिश्र, पं. गौरव तिवारी तथा पं. राजन तिवारी आदि लोग उपस्थित रहें ।
