*”सर कटाकर हुसैन ज़िंदा हैं और जैसे यज़ीद था ही नहीं”* मुहर्रम की अज़मत बचाने को एक मंच पर जुटेंगे 1848 इमामचौकों के मुतवल्ली*
*मुहर्रम की तैयारी, अकीदत और तहज़ीब की हिफाज़त को लेकर 7 जून को होगी ऐतिहासिक बैठक, शहर के जिम्मेदार लोगों से शिरकत की अपील*
गोरखपुर।
कर्बला की वह दास्तान, जिसने इंसानियत को सिर उठाकर जीना सिखाया, आज भी हर मुहर्रम में ज़िंदा हो उठती है। “सर कटाकर हुसैन ज़िंदा हैं और जैसे यज़ीद था ही नहीं” का पैगाम देने वाली इसी अज़ीम विरासत को संजोने और मुहर्रम की रवायतों को अमन, भाईचारे और अनुशासन के साथ आगे बढ़ाने के उद्देश्य से गोरखपुर जनपद के 1848 इमामचौकों के मुतवल्लियों की नुमाइंदगी करने वाली इमामचौक मुतवल्ली एक्शन कमेटी ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है।
यह बैठक 7 जून 2026 को सुबह 10 बजे आइडियल मैरेज हाउस (निकट डॉ. अज़ीज़ अहमद हॉस्पिटल), अबू बाजार, ऊंचवा, गोरखपुर में आयोजित की गयी है। बैठक में जिले भर के इमामचौकों के मुतवल्ली, अखाड़ों के उस्ताद, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि तथा महानगर के गणमान्य नागरिक शामिल होंगे।
कमेटी का मानना है कि मुहर्रम केवल मातम या रस्म का नाम नहीं, बल्कि सत्य, न्याय, त्याग और इंसानियत की रक्षा के लिए दी गई उस महान कुर्बानी की याद है, जिसने दुनिया को ज़ुल्म के सामने झुकने के बजाय डटकर खड़े रहने का सबक दिया। ऐसे में मुहर्रम के आयोजनों को बेहतर ढंग से संपन्न कराने तथा नई पीढ़ी तक कर्बला के संदेश को पहुंचाने के लिए यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
इमामचौक मुतवल्ली एक्शन कमेटी के संरक्षक खैरूल बशर, कन्वीनर हाजी कलीम अहमद फरजंद, कोषाध्यक्ष शकील अहमद अंसारी एवं कमेटी अध्यक्ष अब्दुल्लाह ने जिले के सभी मुतवल्लियों, अखाड़ा संचालकों और समाज के जिम्मेदार लोगों से अपील की है कि वे इस इजलास में अधिक से अधिक संख्या में शिरकत कर कमेटी का हौसला बढ़ाएं और मुहर्रम की पवित्र परंपराओं को मजबूती प्रदान करें।
पदाधिकारियों ने कहा कि जब तक दुनिया में इंसाफ, सच्चाई और इंसानियत का नाम रहेगा, तब तक कर्बला का पैगाम और इमाम हुसैन की कुर्बानी लोगों के दिलों में ज़िंदा रहेगी। यही संदेश लेकर यह बैठक आयोजित की जा रही है, ताकि मुहर्रम की अज़मत और उसकी तहज़ीबी विरासत को आने वाली नस्लों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके।
