मुहर्रम का चांद नजर अया इस्लामी साल 1448 हिजरी का आगाज
गोरखपुर। इस्लामी माह मुहर्रम का चांद मंगलवार, 16 जून की शाम को नजर आया। चांद दिखने के साथ ही नए इस्लामी साल 1448 हिजरी का आगाज हो गया। हिजरी सन् की शुरुआत माहे मुहर्रम से ही होती है।
मुहर्रम की दसवीं तारीख (आशूरा) को पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के प्यारे नवासे हजरत सैयदना इमाम हुसैन रदियल्लाहु अन्हु और उनके साथियों को कर्बला के मैदान में जालिमों द्वारा शहीद कर दिया गया था। उनकी यह कुर्बानी इस्लाम में सब्र, सच्चाई और जुल्म के खिलाफ डटकर खड़े रहने का पैगाम देती है।
अमन और शांति बनाए रखने की अपील
समाज कल्याण एससी/एसटी सदस्य एवं पर्यावरण क्रांति सेना राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, जिला शांति सद्भावना समिति के सदस्य आदिल अमीन ने कहा कि मुहर्रम हमें सब्र, त्याग और इंसानियत का संदेश देता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शरीअत के दायरे में रहकर इबादत करें, रोजा रखें और कर्बला के शहीदों की याद में कुरआन ख्वानी, फातिहा ख्वानी और दुआ ख्वानी का एहतमाम करें।
उन्होंने कहा कि गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करना, उन्हें खाना खिलाना और पानी पिलाना बड़ा सवाब है। मुहर्रम के अवसर पर पौधारोपण कर पर्यावरण को हरा-भरा बनाने का भी संदेश दिया गया।
पहली मुहर्रम से दसवीं मुहर्रम तक मस्जिदों और घरों में ‘जिक्र-ए-शुहदाए कर्बला’ की महफिलों का सिलसिला जारी रहेगा।
उन्होंने लोगों से अपील की कि मुहर्रम के दौरान लंगर, शरबत, फल और पानी की सबील लगाकर इंसानियत की सेवा करें, तथा प्रशासन का सहयोग करते हुए अमन व शांति बनाए रखें। साथ ही बुराइयों और गलत कार्यों से दूर रहने और एक-दूसरे की मदद करने का संदेश दिया।
यह भी उल्लेखनीय है कि मुहर्रम की पहली तारीख को मुसलमानों के दूसरे खलीफा अमीरुल मोमिनीन हजरत सैयदना उमर रदियल्लाहु अन्हु की शहादत हुई थी।
मुहर्रम का संदेश:
नेकी की दावत आम करें, इंसानियत की सेवा करें और अमन-शांति को कायम रखें।
