*मोहर्रम की याद में इंसानियत की मिसाल: घंटाघर पर अल खैर चैरिटेबल ट्रस्ट ने पिलाया शरबत, बांटा पानी और पेठा*
गोरखपुर। मोहर्रम का महीना शुरू होते ही शहर में ग़म-ए-हुसैन की सदाएं गूंजने लगी हैं। इसी सिलसिले में बुधवार को मोहर्रम की पहली तारीख पर अल खैर चैरिटेबल ट्रस्ट की जानिब से गोरखपुर के ऐतिहासिक घंटाघर पर सबील का एहतिमाम किया गया, जहां राहगीरों और आम लोगों को ठंडा शरबत, पानी और पेठा तकसीम किया गया।
मोहर्रम सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हक़, सब्र, कुर्बानी और इंसानियत का पैगाम है। कर्बला के मैदान में जब हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों पर यजीदी फौज ने पानी तक बंद कर दिया था, तब भी उन्होंने ज़ुल्म के सामने सिर नहीं झुकाया। भूखे-प्यासे रहकर हक़ की लड़ाई लड़ने वाले उन जांबाज़ों की याद में दुनिया भर में मोहर्रम मनाया जाता है।
इसी अकीदत और मोहब्बत के साथ अल खैर चैरिटेबल ट्रस्ट ने घंटाघर पर सबील लगाकर लोगों की ख़िदमत की। तेज़ धूप और गर्मी के बीच गुजरने वाले राहगीरों ने शरबत और पानी पीकर राहत महसूस की। कई लोगों ने इस नेक पहल की सराहना करते हुए कहा कि कर्बला का असल पैगाम इंसानियत और ज़रूरतमंदों की मदद करना है।
इस मौके पर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और समाजसेवियों ने कहा कि मोहर्रम का पैगाम नफरत नहीं, बल्कि मोहब्बत, अमन और इंसानी हमदर्दी को बढ़ावा देना है। सबील के जरिए लोगों तक यही संदेश पहुंचाने की कोशिश की गई कि प्यासे को पानी पिलाना और ज़रूरतमंद की मदद करना सबसे बड़ी इबादतों में शामिल है।
मोहर्रम की पहली तारीख पर आयोजित यह सबील न सिर्फ ग़म-ए-हुसैन की याद ताज़ा कर गई, बल्कि शहरवासियों के दिलों में इंसानियत और भाईचारे का पैगाम भी छोड़ गई।



