रामराज्य का यह कैसा हाल, जिसमें कर्मचारी बुढ़ापे में रहें बेहाल – पंडित श्याम नारायण शुक्ल

पुरानी पेंशन कोई तोहफा नहीं बल्कि कर्मचारी का अधिकार और सरकार की नैतिक जिम्मेदारी,मा. हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के अनेक उदाहरण – मदन मुरारी शुक्ल

गोरखपुर।10 फरवरी राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष रुपेश कुमार श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष राजेश सिंह, अशोक पाण्डेय,पंडित श्याम नारायण शुक्ल, मंत्री मदन मुरारी शुक्ल, इजहार अली, अनूप श्रीवास्तव ने संयुक्त बयान में कहा कि  सुप्रीम कोर्ट से समय-समय पर पुरानी पेंशन के लिए जारी आदेशों का समादर करते हुए सरकार को पुरानी पेंशन तत्काल बहाल कर देनी चाहिए, अन्यथा पूरे देश के कर्मचारी अब अपने हक के लिए दो दो हाथ करने को बाध्य है। बेहतर होगा कि देश को असहज स्थिति और विकास अवरूद्ध होने से रोकने के लिए पुरानी पेंशन बहाल कर आंखें चार कर ले। सरकार की यह भूल निश्चित रूप से उसके लिए महंगी साबित होगी, क्योंकि सत्य परेशान हो सकता है,परास्त नहीं। और इस सत्य को विस्तार से परिभाषित करने वाले माननीय चंद्रचूड़ साहब पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट के ही सुपुत्र वर्तमान चीफ जस्टिस हैं। इसीलिए हमें उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि यदि सरकार ने अपना हठ छोड़ अपनी जड़ में मट्ठा डालने से बंचने का काम नहीं किया तो निश्चित ही माननीय चीफ जस्टिस स्वत: संज्ञान लेते हुए कर्मचारियों का हित सुरक्षित रखने अर्थात पुरानी पेंशन बहाल करने का आदेश जारी कर कर्मचारियों के विश्वास को कायम रखेंगे।
कर्मचारी नेताओं ने संयुक्त अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हर कर्मचारी संगठन हम बड़े- हम बड़े का परित्याग कर पुरानी पेंशन बहाली के लिए एक होकर सरकार को बता दें कि हर चुनाव को कर्मचारी ही सम्पन्न कराता है, इसलिए आने वाले चुनाव का केन्द्र विन्दू पुरानी पेंशन होनी चाहिए।

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