अल्लाह रोजेदारों को रहमतों से नवाजता है : गुलाम जिलानी

इबादत व तिलावत में बीता नौवां रोजा


गोरखपुर। माह-ए-रमज़ान का पहला अशरा रहमत का गुरुवार की शाम समाप्त हो जाएगा। दूसरा अशरा मग़फिरत (गुनाहों की माफ़ी) का शुरू होगा। बुधवार को माह-ए-रमज़ान का नौवां रोज़ा नमाज व कुरआन-ए-पाक की तिलावत में बीता। माह-ए-रमज़ान की रहमत सभी पर बराबर बरस रही है। करीब 13 घंटा 31 मिनट का रोज़ा रोजेदारों के सब्र का इम्तिहान ले रहा है, हालांकि मौसम से काफी राहत मिलती मिल रही है। रोजेदार अल्लाह को राज़ी करने में जी जान से जुटे हुए हैं। दिन में रोज़ा रात में तरावीह की नमाज पढ़ी जा रही है। बाज़ार गुलज़ार है।

हज्जिन बीबी जामा मस्जिद धर्मशाला बाज़ार में सामूहिक रोजा इफ्तार हुआ। सबने मिलकर रोजा खोला और दुआ मांगी। वहीं दरगाह हज़रत मुबारक खां शहीद मस्जिद नार्मल, शाही जामा मस्जिद तकिया कवलदह, हज्जिन बीबी जामा मस्जिद धर्मशाला बाजार, दरोगा मस्जिद अफगानहाता में तरावीह की नमाज़ के दौरान एक कुरआन-ए-पाक पूरा हुआ। हाफिज-ए-कुरआन को तोहफों व दुआओं से नवाजा गया।

मुकीम शाह जामा मस्जिद बुलाकीपुर में तरावीह नमाज़ के इमाम हाफिज गुलाम जिलानी ने बताया कि दीन-ए-इस्लाम के पांच बुनियादी वसूल में रोज़ा भी एक है और इस अमल के लिए माह-ए-रमज़ान मुकर्रर किया गया। पाक परवरदिगार भी इबादत गुजार रोजेदार बंदे को बदले में रहमतों और बरकतों से नवाजता है। पैग़ंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान है कि जो मुकद्दस रमज़ान में किसी मजलिस-ए-जिक्र में शिरकत करता है, अल्लाह उसके हर-हर कदम के बदले में एक-एक साल की इबादत का सवाब लिखता है। कयामत के दिन वह अर्श के साए में होगा। जो कोई मुकद्दस रमज़ान में नमाज़ें बा जमात अदा करता है यानी हर फ़र्ज़ नमाज बा जमात ही पढ़ता है, अल्लाह उस खुशनसीब को हर-हर रकात के बदले में नूर का एक शहर अता फरमाएगा।

मुकद्दस रमज़ान में दुआएं ज्यादा क़बूल होती हैं : हाफिज अशरफ़

नूरानी मस्जिद हुमायूंपुर उत्तरी के इमाम हाफिज मो. अशरफ़ ने बताया कि पैगंबरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि दुआ बंदे की तीन बातों से खाली नहीं होती। पहला उसका गुनाह बख़्शा जाता है। दूसरा उसे फायदा हासिल होता है। तीसरा उसके लिए आखिरत में भलाई जमा की जाती है। मुकद्दस रमज़ान में तो दुआएं ज्यादा कुबूल होती हैं इसलिए मुकद्दस रमज़ान में दुआएं जरूर मांगी जाए। इफ्तार के समय की दुआ खाली नहीं जाती। रोजेदार के लिए तो फरिश्ते व दरिया की मछलियां तक दुआ करती हैं। दुआ मांगने का पहला फायदा यह है कि अल्लाह के हुक्म की पैरवी होती है कि उसका हुक्म है कि मुझसे दुआ मांगा करो। दुआ मांगना सुन्नत भी है।

रोज़े की हालत में उल्टी आने से रोज़ा नहीं टूटेगा : उलमा किराम

उलमा-ए-अहले सुन्नत द्वारा जारी रमज़ान हेल्पलाइन नंबरों पर बुधवार को सवाल-जवाब का सिलसिला जारी रहा। लोगों ने नमाज़, रोज़ा, जकात, फित्रा आदि के बारे में सवाल किए। उलमा किराम ने क़ुरआन व हदीस की रोशनी में जवाब दिया।

  1. सवाल : क्या रोज़े की हालत में उल्टी आने से रोज़ा टूट जाता है? (अशहर, बड़े काजीपुर)

जवाब : नहीं, रोज़े की हालत में खुद ब खुद उल्टी आने से रोज़ा नहीं टूटता, अगर्चे मुंह भर हो या उससे भी ज्यादा। (मौलाना मोहम्मद अहमद)

  1. सवाल : खरीदी हुई जमीन पर ज़कात है या नहीं? (गोल्डी, बड़गो)
    जवाब : अगर रिहाइशी मकान के लिए खरीदा है तो उस पर ज़कात नहीं। अगर तिजारत (बिजनेस) की नियत से खरीदा है तो उस पर ज़कात फ़र्ज़ है। (मुफ्ती अख़्तर)

By Minhajalisiddiquiali

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