ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक विकासात्मक विकार है जो आमतौर पर बचपन में भी अपना शिकार बना लेता है। इसकी वजह से पीड़ित बच्चे के व्यवहार सोशल कॉन्टेक्ट और बातचीत करने की क्षमता प्रभावित होती है। इस बीमारी का कोई इलाज तो नहीं है लेकिन समय रहते इसकी पहचान कर इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं इसके कुछ प्रमुख लक्षण।

Autism एक लाइलाज बीमारी है, जो आमतौर पर बचपन में होती है।

इसका इलाज न होने की वजह से इसके लक्षणों की पहचान जरूरी है।

समय रहते लक्षणों को पहचान कर इसे कम किया जा सकता है।

Arushan News Gorakhpur:-ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक ऐसी समस्या है, जिसका कई लोगों का अंदाजा नहीं होता। यही वजह है कि ज्यादातर लोग अक्सर शुरुआती स्टेज में इसकी पहचान नहीं कर पाते हैं। यह एक डेवेलपमेंटल डिसएबिलिटी है, जिसका निदान अक्सर बचपन में किया जाता है। इसे पहले ऑटिज्म के नाम से जाना जाता था, लेकिन अब इसके Autism spectrum disorder (ASD) कहा जाता है। सही समय पर इसकी पहचान कर बच्चों की सही समय पर मदद की जाती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे बच्चों में इस बीमारी के कुछ शुरुआती संकेतों के बारे में-

क्या है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर?

क्लीवलैंड क्लनिक के मुताबिक ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) एक न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन है, जो आमतौर पर बचपन में भी सामने आ जाती है। एएसडी होने पर आपके बच्चे के बातचीत और संवाद करने के तरीके को बदलाव आ जाता है। ऑटिज्म का कोई इलाज नहीं है, लेकिन समय के साथ लक्षण कम हो सकते हैं।

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