‼️होली के पर्व पर कुछ खास सतर्कता‼️
घर के बने रंग, मिष्ठान व पकवान से ही करें एक दूसरे का स्वागत❗
मिलावट को देखते हुए खुद से तैयार किए गए खोया और देशी घी की मिठाई घर पर बनाएं, बाजार के मिलावटी तेल, घी और खोये से बनी मिठाइयाँ आपकी सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं | मिलावट के चलते बाहरी चीजों के सेवन से बचना ही श्रेयस्कर होगा । बाजार के खोये में उबाली आलू, शकरकंदी के अलावा कई अन्य नुकसानदायक सामग्री को मिलाकर दुकानदारों द्वारा बेचा जाता है | मुनाफाखोर सुगंध मिलाकर देशी घी बनाते हैं । नमकीन और मसालों में भी खूब मिलावट की जाती है। ऐसी चीजों का सेवन करने से हम लोग बीमार पड़ सकते हैं | ऐसे में उचित यही रहेगा कि नमकीन घर पर बनाएं और बाजार के खोये की जगह मेवे के साथ सूजी का इस्तेमाल करें ।
मधुमेह, गुर्दा, ह्रदय व उच्च रक्तचाप के रोगी खानपान में विशेष परहेज बरतें । होली की मस्ती में अत्यधिक मिठाई, घी, तेल और नमक का सेवन न करें, नहीं तो होली का त्योहार आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा । अगर इन बीमारियों से आप ग्रसित हैं तो अपने चिकित्सक द्वारा बतायी गयी दवाओं का सेवन नियमित करते रहें।
रासायनिक रंगों से रहना होगा सतर्क❕
बाजार में होली के समय बिकने वाले रासायनिक रंग बाल, आँख व त्वचा के लिए अत्यंत नुकसानदेह हो सकते हैं | अगर यह रंग किसी भी प्रकार से शरीर के अंदर चले जाएं तो श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र, गुर्दे, लीवर और ह्रदय तक को नुकसान पहुंचाते हैं । होली पर घातक रासायनिक रंगों की जगह हर्बल रंगों का प्रयोग लाभदायक होता है । लेकिन हर्बल रंग बाजार में अत्यंत महंगे बिकते हैं, इसलिए दुकानदार अक्सर उस पर नकली लेबल लगा कर रासायनिक रंग को हर्बल रंग बना कर बेचते हैं । ऐसे में उचित होगा हल्दी, चंदन, रोली मिला कर घर पर अबीर बनाएं। गेंदे के फूल, मेहंदी की पत्तियों और चुकंदर को उबाल कर गीला रंग भी बना सकते हैं । भरसक प्रयास करें कि होली में सूखे रंग का ही प्रयोग करें।
बच्चों को अकेले होली न खेलने दें।
जब भी होली खेलने जाएं तो पूरी बांह के मोटे कपड़े पहने, जूते पहने, सर पर तेल लगा कर टोपी लगाएं और शरीर के खुले हुए भाग पर कोई भी तेल या मास्चराइजर लगाए, नाखूनों पर नेलपॉलिश लगाएं, यदि कॉन्टैक्ट लेंस लगते हैं तो उसे निकाल दें और आंखों पर चश्मा लगा कर होली खेलने जाएं। जब होली की हुड़दंग हो तो गर्भवती माताओं को इससे दूर रहना चाहिए।
होली खेलने के बाद रंग को छुड़ाने के लिए कपड़ा धोने का साबुन, कास्टिक या अन्य किसी घातक केमिकल का प्रयोग ना करें। रंग को छुड़ाने के लिए उबटन या अपने दैनिक प्रयोग का साबुन ही इस्तेमाल करें।
होली में मदिरा और भांग से हमेशा दूर रहें। क्योंकि इनसे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है और नशे की स्थिति में लोग अक्सर सामाजिक अपराध कर बैठते हैं, जिसके लिए हमेशा पछताना पड़ता है। नशे के कारण होली के समय सड़क दुर्घटना, की भी आशंका बढ़ जाती है। बाहर से आने वाले यात्री को, यात्रा के दौरान जहरखुरानियों से सतर्क रहें, और किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा दी गयी किसी भी खाद्य सामग्री का सफर में सेवन न करें।
होली सदैव अपनों के बीच खेलना चाहिए और जो लोग रंग और गुलाल पसंद करें उन्हें ही लगाना चाहिए। होली सदैव अपने मोहल्ले और गली में ही खेलना चाहिए, घर से दूर तथा अपरिचितों के साथ होली नहीं खेलना चाहिए।
होली का पर्व प्रेम और भक्ति का है।सम्मान प्रकट करने के लिए गले मिलने के बजाय अभिवादन और हाथ जोड़ कर प्रणाम तथा अग्रजों का चरण स्पर्श करके भारतीय सनातन परम्पराओं का अनुसरण करते हुए एक दूसरे को होली की खुशियां एवं आशीर्वाद बांटें। "हैप्पी होली-शुभ होली"
