गोरखपुर,छठ प्रकृति का महोत्सव हैl एक ऐसा त्यौहार जहां भक्त डूबते और उगते सूर्य दोनों की पूजा करते हैंl घाटों पर उमड़ती श्रद्धा की भीड़, जल में खड़े होकर अर्य्य देते व्रती, इस सभी प्रकृति के प्रति समर्पण भाव से नतमस्तक होते हैंl एक ऐसा महोत्सव जहां आस्था,प्रकृति और सामाजिक एकता एक साथ बहती है जो भारतीय लोक जीवन की विविधता को सहज भाव से प्रस्तुत करता है l यह दुनिया का इकलौता पर्व,जहां डूबते हुए सूर्य को अर्ध्य दिया जाता हैl तीन दिनों तक निराहार रहकर स्त्रियां मौसमी फूलों, फलों,ठेकुओं से टोकरी सजाती हैं और घुटनों भर पानी में खड़ी होकर पहले डूबते हुए सूर्य को और अगले दिन उगते हुए सूर्य को अर्ध्य दे देती हैं l स्त्रियां एक स्वर में गीत गाती हैं मन में दबी हुई सारी इच्छाएं पूरी होती हैंl छठ जैसा त्यौहार जातिगत भेदभाव को मिटा देता है l जिस सूप में प्रसाद चढ़ता है,वह दलित ही बनाता हैंl दीपावली के छठे दिन मनने वाला सूर्य महोत्सव जो छठ का त्यौहार है, बड़ी धूमधाम से भारत में मनाया जाता हैl इसी पावन पर्व के अवसर पर हुमायुपुर, उत्तरी निवासी शिवकृपा भवन में छठ पूजा का महापर्व धूमधाम से मनाया गयाl जिसमें व्रती मंजू गुप्ता,आशा गुप्ता, सरिता गुप्ता, अंजू गुप्ता, मिनकी गुप्ता,मालती गुप्ता,स्वाति गुप्ता,आँचल, सुशील गुप्ता,मानिक गुप्ता, उमेश गुप्ता, मनोज गुप्ता, मनुशील, ऋषभ गुप्ता, मोहित गुप्ता उमंग गुप्ता, मिहिर गुप्ता, वर्धन गुप्ता एवं परिवार के सभी सदस्य तथा आए हुए अतिथिगण लोगों ने सूर्य देवता को अर्ध्य देते हुए अपनी-अपनी मनोकामना के लिए प्रार्थना की एवं महाप्रसाद ग्रहण कियाl व्रती मंजू गुप्ता और उनके पति सुशील गुप्ता ने बताया कि,परिवार की मनोकामना पूरी होने पर चार कोसिया भरी गई l

Leave a Reply

Discover more from Arushan News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading