गोरखपुर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ गोरखपुर के एक प्रतिनिधि मंडल ने राज्य सभा सांसद व भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राधा मोहन दास अग्रवाल व गोरखपुर सांसद रवि किशन शुक्ल को एक ज्ञापन मंडल अध्यक्ष राजेश शुक्ल के नेतृत्व में सौंपा। ज्ञापन में मांग किया गया कि देशभर के अनुभवी एवं वर्षों से कार्यरत शिक्षकों पर अनिवार्य टेट लागू करने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है बल्कि यह शिक्षकों के सम्मान,अनुभव तथा शिक्षा व्यवस्था में उनके दीर्घकालिक योगदान की उपेक्षा भी करता है। मंडल अध्यक्ष राजेश कुमार शुक्ल ने कहा कि अनेक शिक्षक लंबे समय से विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था में उत्कृष्ट सेवाएँ दे रहे हैं तथा उनकी कार्यक्षमता सिद्ध एवं संतोषजनक है। ऐसे में उन पर पुनः टेट अनिवार्य करना अनुचित एवं असंगत है।गोरखपुर सहसंयोजक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि यह निर्णय शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव उत्पन्न करता है और स्थिरता के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता को भी प्रभावित करने की आशंका पैदा करता है।प्रतिनिधि मंडल ने सांसदों से अनुरोध किया कि वे इस मुद्दे को संसद और सरकार के समक्ष कल से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में प्रभावशाली ढंग से उठाएँ,ताकि देशभर के शिक्षकों को इस अनिवार्य व्यवस्था से राहत मिल सके तथा उनके अनुभव, योग्यता और सेवाओं का सम्मान सुरक्षित रखा जा सके। सांसदों ने शिक्षकों की भावनाओं को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं को उचित मंच पर मजबूती से रखा जाएगा। प्रतिनिधि मंडल ने आशा व्यक्त की कि सरकार शिक्षकों के हित में शीघ्र ही सकारात्मक निर्णय लेगी और उनके सम्मान को बनाए रखेगी। इस अवसर पर उपाध्यक्ष श्याम सुंदर तिवारी,मंत्री सुनील कुमार,संजय मिश्र, सत्यव्रत गुप्त, हरिश्चंद्र साह,विनय सिंह, अनूप पटेल आदि उपस्थित रहे।

