गोरखपुर ।विभांशु वैभव द्वारा लिखित तथा श्रीनारायण पाण्डेय द्वारा निर्देशित नाटक महारथी का ग्यारहवां मंचन शाही मार्केट स्थित अभियान रूम थिएटर में किया गया।नाटक में महाभारत कथा के माध्यम से आधुनिक काल में व्याप्त जातिवाद व वर्ण व्यवस्था का दुख और स्त्रियों की बेबसी तथा युद्ध के उपरांत होने वाले वीभत्स परिणामों जैसे संवेदनशील समस्याओं को उजागर किया गया। महाभारत कथा का महारथी योद्धा कर्ण धनुर्विद्या में उत्कृष्ट योग्यता होने के बाद भी सामाजिक जाति व वर्ण व्यवस्था के कारण जीवन भर अपनी योग्यता सिद्ध कर पाने से उपेक्षित रहा। कर्ण को उस महारथी पर्व में जिसका आधार पौरुष बल था, केवल शूद्र जाति का होने के कारण भाग लेने से मना कर दिया जाता है। क्षमता के आधार पर सर्वश्रेष्ठ घोषित न करके धर्मशास्त्र और धर्मनीति की पाखंडों के आड़ में उसे प्रतिस्पर्धा से वंचित करके ऊंची जाति के राजकुमार अर्जुन को सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर घोषित कर दिया जाता है। भारतीय समाज में आजादी के 78 साल बाद भी कई जगहों पर अछूत माने जाने वाले जाति के कई लोगों को कर्ण के ही भांति अमानवीय व्यवहार, सामाजिक बहिष्कार और सार्वजनिक संसाधनों से वंचित रखा जाता है। अस्पृश्यता, भेदभाव और छुआछूत तथा भारतीय जाति व्यवस्था की गहरी जड़ों के कारण अपने कई वंशों के दमनचक्र से ग्रसित कर्ण जैसे आज के कई महारथियों के संघर्ष को यह नाटक बहुत ही सुगम और सहज तरीके से दिखाता है, यही इस नाटक की प्रासंगिकता है, जो आज के समय में भी उतना ही महत्वपूर्ण है। नाटक में कर्ण को इस अभिशप्त व्यवस्था के कारण हुए जीवन भर की दुख और प्रताड़नाओं को अभिनेताओं ने मंच पर बहुत ही आकर्षित तरीके से प्रदर्शन किया। नाटक में अभिनय के साथ-साथ इसके संवादों ने -"कि क्या जन्म पर किसी का अधिकार है ? क्या समाज में अधिकारों का वर्गीकरण जन्म के आधार पर होना चाहिए, योग्यता के आधार पर नहीं ? भारतीय समाज के जातिवाद का यह दमनचक्र कब तक चलेगा ?" जैसे कई प्रश्नों को दर्शकों के सामने खड़ा किया । मंच पर कर्ण की भूमिका में मनीष यादव, कृष्ण- आदर्श मिश्रा, दुर्योधन- सुमितेन्द्र कुमार, द्रोणाचार्य- राहुल कुशवाहा, वृषाली -कनक कुमारी, द्रोपदी-गर्विता राय, कुंती रितिका गुप्ता, अर्जुन आदित्य, धृतराष्ट्र – सत्यम मिश्रा, गांधारी- श्रेया चंद, सखी-कलश कुमारी, द्रुपद बैदेही शरण, भीम राहुल विश्वकर्मा, युधिष्ठिर- अमित सोलंकी, नकुल- प्रशान्त चौबे, सहदेव रिषभ चन्द, प्रहरी 1- सेवक अमन चंद, प्रहरी 2- रवि कुमार कुशवाहा आदि रहे। मंच परे में लाइट डिजाइन विशाल गुप्ता, म्यूजिक गर्विता राय, रितिका गुप्ता, आशीर्वाद श्रीवास्तव। वस्त्र विन्यास-कलश, कनक। रूप सज्जा सुमितेन्द्र कुमार, कनक, कलश स्टेज मैनेजर बैदेही शरण, सह निर्देशन -सुमितेन्द्र कुमार, परिकल्पना एवं निर्देशन श्री नारायण पाण्डेय का रहा।

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