*नारद मोह की कथा सुनकर भाव विभोर हुए श्रोता*
जंगल कौड़िया। ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत कुसहरा में नव दिवसीय क्षी क्षी रुद्र महायज्ञ के पांचवें दिन श्रद्धालुओं को नारद मोह कथा का रसपान करती अयोध्या धाम से पधारी कंचन किशोरी ने श्रद्धालुओं को कथा में संगीत भजनों पर झूमा दिया कथा का रसपान कराते हुए कहा कि अपने ब्रह्मचर्य का अहंकार नारद जी के मन में एक बार उत्पन्न हुआ भोलेनाथ के आवाहन पर अहंकार का आहार करने वाले श्री हरि विष्णु ने एक माया नगरी की स्थापना की नारद ने विष्णु से हरि स्वरूप मांगा श्री विष्णु ने पूरा शरीर मनुष्य का और मुख बंदर का दे दिए जिससे नारद जी का अहंकार टूट गया अपने स्वरूप को आईने में देखते ही नाराज होकर श्री हरि विष्णु को नारद ने श्रापित किया कि जैसे ही मेरी शादी न होने से अपने पत्नी के वियोग में तड़प रहा हूं इस प्रकार से आप भी एक दिन अपने पत्नी के वियोग में तड़पेंगे । कथा शुभारंभ के पूर्व ज्ञान प्रकाश सिंह उर्फ सोनू ने विधि विधान से व्यास पीठ की आरती उतारी यज्ञाचार्य दिनेश मणि त्रिपाठी में बताया कि अग्नि आवाहन के बाद 33 करोड़ देवी देवताओं का आवाहन यज्ञ स्थल पर किया गया है जिसमें ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मित्रों के द्वारा यजमान पूजा पाठ कर रहे है इस दौरान ध्रुव नारायण सिंह, राजेश गौड़, कृष्णानंद सिंह, निरपत दुसाद, अशोक सिंह, सुंदरम, राम सिंह सहित क्षेत्रीय लोग कथा में मौजूद रहे।
