गोरखपुर । सदन में मुख्यमंत्री द्वारा शिक्षामित्र का मानदेय 10000 से बढ़ाकर 18000 किए जाने और पहली अप्रैल से लागू किए जाने की घोषणा पर जनपद के शिक्षामित्रों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है ।
विदित हो कि शिक्षामित्र योजना 1999-2000 से उस समय के तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय कल्याण सिंह जी के समय में शुरू की गई । जिस समय विद्यालयों में भारी शिक्षकों की कमी थी बहुत सारे विद्यालयों में ताले लटके थे शिक्षा व्यवस्था ध्वस्त हो गया था जिससे शिक्षामित्र की नियुक्ति होने से विद्यालयों का शिक्षण कार्य सुचारु रूप से चलने लगा । उस समय इनका मानदेय 2250 था उसके बाद 2 वर्षीय दूरस्थ बीटीसी का कोर्स करवाया गया तथा 2014 में इनका सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन हुआ और 25 जुलाई 2017 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इनके समायोजन को रद्द किया और तब से इन लोगों ने संघर्ष की राह को पकड़ा, जिले से लेकर लखनऊ दिल्ली तक धरना प्रदर्शन का दौर चला प्रदेश स्तर पर हाई पावर कमेटी बनी लगभग 9 साल बाद अब मानदेय बढ़ाए जाने पर शिक्षामित्र में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है । इस संदर्भ में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला अध्यक्ष राम नगीना निषाद व वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष अविनाश कुमार ने बताया माननीय सुप्रीम कोर्ट से 25 जुलाई 2017 को जब से समायोजन रद्द हुआ तब से बहुत सारे शिक्षामित्र और अवसादग्रस्त हुए बहुत सारे शिक्षामित्रों ने अपनी जीवन लीला खत्म कर दी ,बहुत सारे तमाम बीमारियों से ग्रसित हो गए इलाज के अभाव में अपने प्राणों को त्याग दिया । संगठन लगातार शासन प्रशासन से मानदेय वृद्धि की मांग करता चला आ रहा था इस बीच संगठन व शासन के बीच बातचीत से समन्वय स्थापित हुआ और जिसका परिणाम आज माननीय मुख्यमंत्री जी ने शिक्षामित्र का 10000 से मानदेय बढ़ाकर 18000 करते हुए 1 अप्रैल से लागू करने की घोषणा की इस पर जिले व प्रदेश के शिक्षामित्र माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद देते हैं । भविष्य में भी माननीय मुख्यमंत्री जी की कृपा शिक्षामित्र पर बनी रहेगी इसका हम सभी शिक्षामित्र उम्मीद करते हैं ।

