नेक बातें फैलाना और बुराई से रोकना स्वस्थ समाज के लिए जरूरी : मुफ्ती अख्तर
गोरखपुर। सब्जपोश हाउस मस्जिद जाफरा बाजार में दीनी संगोष्ठी हुई। कुरआन-ए-पाक की तिलावत हाफिज रहमत अली निजामी ने की। मुख्य वक्ता मुफ्ती-ए-शहर अख्तर हुसैन ने कहा कि नेक बातें फैलाना और बुराई से रोकना इस्लाम के मूल सिद्धांतों में से है। यह केवल एक व्यक्तिगत सलाह नहीं, बल्कि समाज को सुधारने की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानी गई है। कुरआन के अनुसार यह वह गुण है जो मुसलमानों को “सबसे अच्छी उम्मत” (सर्वश्रेष्ठ समुदाय) बनाता है क्योंकि वे नेक कामों का हुक्म देते हैं और बुरे कामों से रोकते हैं। अगर लोग बुराई देखते हुए भी चुप रहते हैं, तो इसका परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। नेकी फैलाना समाज में शांति और नैतिकता बनाए रखने के लिए जरूरी है। नेकी की सलाह देते समय समझदारी, अच्छी बातचीत और धैर्य का होना जरूरी है। नेक बातें फैलाना और बुराई से रोकना एक स्वस्थ समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है, जो अच्छाई को बढ़ावा देकर नफरत और पापों को कम करता है। यह न केवल एक धार्मिक कर्तव्य है, बल्कि सामाजिक सुधार का आधार भी है। यदि बुराई देखें तो उसे पहले अपने हाथ से रोकने की कोशिश करें, यह न हो सके तो ज़बान से रोकें और यह भी न हो सके तो इसे दिल में बुरा जानें। नेक काम करने के लिए अच्छे व्यवहार, प्यार और दया का उपयोग करें, क्योंकि नफरत को नफरत से नहीं, बल्कि अच्छाई से ही खत्म किया जा सकता है। दूसरों में कमियां निकालने के बजाय, सकारात्मक पहलू खोजने का प्रयास करें। बुराई से लड़ने के लिए ईमानदारी, सही ज्ञान और धैर्य का होना बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि उम्मत-ए-मुस्लिमा को बेहतरीन उम्मत (समुदाय) होने का दर्जा कुछ खास जिम्मेदारियों और गुणों की वजह से दिया गया है भलाई का हुक्म देना, लोगों को अच्छे कामों की प्रेरणा देना, बुराई से रोकना, समाज में फैली बुराइयों और गलत कामों को रोकने की कोशिश करना और अल्लाह के एक होने और उसकी संप्रभुता पर सच्चा विश्वास रखना। नेकी का आदेश देना और बुराई से रोकना और अल्लाह पर सच्चा ईमान और उसकी इबादत करना इस उम्मत की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
अंत में दरूदो सलाम पढ़कर शीरीनी बांटी गई। संगोष्ठी में मुहम्मद अनस नक्शबंदी, नेहाल अहमद, सैयद ताहिब, अली अफसर, हाजी रफीउल्लाह, हाजी बदरुल हसन, जावेद, आकिब, जीशान सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
