अरीब बने हाफिज-ए-कुरआन, हुई दस्तारबंदी
गोरखपुर। मोहल्ला घोसीपुर तिवारीपुर के रहने वाले रईस अहमद खान व रशीदा खातून के पुत्र अरीब अहमद निज़ामी पूरा क़ुरआन-ए-पाक याद कर हाफिज बन गए हैं। मदरसा हुसैनिया के शिक्षक कारी शरफुद्दीन मिस्बाही की देखरेख में अरीब ने पूरा क़ुरआन-ए-पाक याद किया है। खुशी के इस मौके पर जलसे का आयोजन हुआ। जिसमें अरीब के सर पर दस्तार बांधी गई। फूल मालाओं, तोहफों व दुआओं से नवाजा गया।
जलसे में उलमा किराम ने कहा क़ुरआन-ए-पाक एक ऐसी किताब है जो बताती है कि हमें कैसे ज़िंदगी गुजारनी है। हर बात का जिक्र क़ुरआन में है। नसीहत करते हुए कहा कि इल्म की शम्मा से हमको मोहब्बत होनी चाहिए। हमें ग़रीबों की सहायता करनी चाहिए। दर्दमंदों व बुजुर्गों से मोहब्बत करनी चाहिए। हमें हर वक्त अल्लाह से दुआ मांगनी चाहिए कि हम हर तरह की बुराई से बचें रहें और नेकी की राह पर चलें। इंसानी ज़िंदगी में शिक्षा का बहुत महत्व है। शिक्षा के बगैर इंसान व समाज की तरक्की मुमकिन नहीं। समाज के अंदर शिक्षा के प्रति जागरुकता लाई जाए। इस्लाम धर्म में शिक्षा का उच्च स्थान है। इस्लाम धर्म ने शिक्षा हासिल करने की बड़ी ताकीद की है, इसलिए हमें अपने बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा दिलानी चाहिए। दीनी शिक्षा हासिल किए बिना मुकम्मल इंसान नहीं बना जा सकता। बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, वकील के साथ दीनदार बनाएं। बच्चा अगर दीनदार होगा तो वह जिस भी क्षेत्र में जाएगा दीन-ए-इस्लाम उसकी रहनुमाई करता नज़र आएगा। औलाद का अधिकार है कि उनकी अच्छी शिक्षा व तरबियत का इंतजाम किया जाए।
अंत में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में सुख-शांति की दुआ मांगी गई। अरीब को मुबारकबाद देने वालों में मौलाना मो. सईद निज़ामी, मुफ्ती अख्तर हुसैन, मुफ्ती अजहर शम्सी, मुफ्ती मेराज अहमद, कारी अफ़ज़ल, हाफिज रहमत अली, मौलाना महमूद रज़ा, गुफरान अहमद, दानियाल अहमद, मुजम्मिल, फुरकान, मोहसिन, मिन्हाज, एमादुद्दीन, अफरोज कादरी आदि शामिल रहे।
